Republic Day Violence: दिल्ली की एक अदालत ने गणतंत्र दिवस पर ‘ट्रैक्टर परेड’ के दौरान लाल किले पर हुई हिंसा के मामले में गिरफ्तार कार्यकर्ता-अभिनेता दीप सिद्धू (Deep Sidhu) को 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया. सिद्धू को इस मामले में 7 दिनों की पुलिस हिरासत की अवधि समाप्त होने के बाद मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट समरजीत कौर की अदालत में पेश किया गया था. उसे तिहाड़ जेल में मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया गया जहां वह अभी बंद है. Also Read - 80 साल की 'दादी' को किया सम्मानित, फिर स्वाति मालीवाल ने कंगना रनौत को दी चुनौती, कहा- कुछ ऐसी हैं, जो...

अदालत ने सिद्धू को 9 फरवरी को 7 दिन की पुलिस हिरासत में भेजा था. पुलिस का आरोप है कि वह लाल किले पर हुई हिंसा को भड़काने वाले मुख्य लोगों में से एक है. उसकी हिरासत अवधि 16 फरवरी को 7 और दिनों के लिये बढ़ा दी गई थी. पुलिस ने कहा था कि ऐसे वीडियो हैं जिनमें सिद्धू को कथित तौर पर घटनास्थल पर मौजूद देखा जा सकता है. Also Read - संयुक्त किसान मोर्चा ने कहा- हरियाणा सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव का समर्थन करने को BJP-JJP विधायकों पर डालें दबाव

पुलिस ने आरोप लगाया था, टवह भीड़ को उकसा रहा था. वह मुख्य दंगाइयों में से एक था. सह-साजिशकर्ताओं की पहचान के लिये कई सोशल मीडिया खातों की जांच करने की जरूरत है. उसका स्थायी पता यद्यपि नागपुर दिया गया है, लेकिन पंजाब और हरियाणा में कई स्थानों पर जाकर छानबीन की जरूरत है जिससे और विवरण का खुलासा हो सके.’ Also Read - Farmers Protest: टिकरी बॉर्डर पर एक और किसान ने की आत्महत्या, सुसाइड नोट में कृषि कानूनों को बताया जिम्मेदार

पुलिस के मुताबिक, ‘उसे झंडा फहराने वाले एक व्यक्ति के साथ बाहर आते और उसे बधाई देते देखा जा सकता है. वह बाहर आया और ऊंची आवाज में भाषण देकर वहां मौजूद भीड़ को उकसाया. वह भड़काने वाले मुख्य लोगों में था. उसने भीड़ को उकसाया जिसकी वजह से हिंसा हुई. हिंसा में कई पुलिसकर्मी जख्मी हो गए.’ सिद्धू के वकील ने हालांकि दावा किया कि उसका हिंसा से कोई लेना देना नहीं था और वह बस गलत वक्त पर गलत जगह था.

मालूम हो कि केंद्र के तीन नए कृषि कानूनों को निरस्त करने की अपनी मांग को लेकर 26 जनवरी को किसान संघों के आह्वान पर राष्ट्रीय राजधानी में निकाली गई ‘ट्रैक्टर परेड’ के दौरान हजारों किसानों की पुलिसकर्मियों के साथ हिंसक झड़प हुई थी. इसी बीच कई प्रदर्शनकारी ट्रैक्टर के साथ लालकिले पहुंच गए और स्मारक में घुस गए. कुछ लोगों ने लाल किले पर चढ़कर ध्वज स्तंभ पर धार्मिक झंडा लगा दिया. ट्रैक्टर परेड के दौरान हुई हिंसा में 500 से ज्यादा पुलिसकर्मी घायल हुए थे जबकि एक प्रदर्शनकारी की मौत हो गई थी.

(इनपुट: भाषा)