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बीजेपी में प्रदेश अध्यक्षों को लेकर हो रहा फेरबदल, कुछ पुराने चेहरे को मिल सकता है दोबारा मौका
भारतीय जनता पार्टी को अधिकांश राज्यों में 15 दिसंबर तक नए प्रदेश अध्यक्ष मिल जाएंगे.
नई दिल्ली: सब कुछ तय समय के मुताबिक हुआ तो भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को अधिकांश राज्यों में 15 दिसंबर तक नए प्रदेश अध्यक्ष मिल जाएंगे. कुछ राज्यों में मौजूदा प्रदेश अध्यक्षों को दोबारा मौका दिया जा सकता है. भाजपा ने सभी राज्यों में प्रदेश अध्यक्ष के चुनाव के लिए दो-दो वरिष्ठ नेताओं की नियुक्ति की है. संगठन चुनाव के लिए राष्ट्रीय महासचिवों से लेकर केंद्रीय मंत्रियों की ड्यूटी लगाई गई है.
भाजपा ने उत्तर प्रदेश में अध्यक्ष के चुनाव के लिए राष्ट्रीय महासचिव भूपेंद्र यादव तथा बिहार के मंत्री मंगल पांडेय को पर्यवेक्षक बनाया है. इसी तरह उत्तराखंड में शिवराज सिंह चौहान व केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल, पश्चिम बंगाल में राष्ट्रीय महासचिव पी मुरलीघर राव व केंद्रीय राज्य मंत्री किरन रिजीजू, तमिलनाडु में राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय और राष्ट्रीय प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी को पार्टी ने पर्यवेक्षक नियुक्त किया है.
महाराष्ट्र के लिए राष्ट्रीय उपाध्यक्ष ओम माथुर और केंद्रीय राज्य मंत्री मनसुख भाई मंडाविया, राजस्थान में केंद्रीय राज्य मंत्री नित्यनांद राय और राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बैजयंत जय पांडा, गुजरात में केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद व राष्ट्रीय महासचिव अरुण सिंह, आंध्र प्रदेश में केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह व बिहार के मंत्री मंडल पांडेय को पर्यवेक्षक बनाया गया है. छत्तीसगढ़ के लिए भूपेंद्र यादव और केशव प्रसाद मौर्य, जम्मू-कश्मीर में केंद्रीय मंत्री डॉ. हर्षवर्धन और राष्ट्रीय मंत्री तरुण चुग, कर्नाटक में राष्ट्रीय महासचिव राम माधव और केंद्रीय राज्य मंत्री श्रीपद यसो नाइक को जिम्मेदारी मिली है.
हरियाणा में प्रदेश अध्यक्ष के चुनाव के लिए केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत और राष्ट्रीय उपाध्यक्ष अविनाश राय खन्ना को जिम्मेदारी मिली है. झारखंड में चल रहे असेंबली इलेक्शन के कारण अभी प्रदेश अध्यक्ष का चुनाव नहीं होगा. अधिकांश राज्यों में 15 दिसंबर तक पार्टी नए प्रदेश अध्यक्ष का चुनाव कर लेना चाहती है. जिन राज्यों में बूथ, मंडल और जिला स्तर पर कमेटियों का चुनाव देरी से हुआ है, वहां प्रदेश अध्यक्ष के चुनाव में अधिक समय लग सकता है. हालांकि दिसंबर खत्म होने तक सभी स्तर पर संगठन के पदाधिकारियों का चुनाव हो जाने की बात कही जा रही.
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