नई दिल्ली: सरकार ने बुधवार को राज्यसभा में कहा कि सेवानिवृत्त सैन्यकर्मी मोहम्मद सनाउल्ला को पिछले माह असम के एक हिरासत शिविर में इसलिए रखा गया क्योंकि वह राज्य में विदेशी नागरिक न्यायाधिकरण के समक्ष इस बात के साक्ष्य रखने में विफल रहे कि वह जन्म से भारतीय हैं.

गृह राज्य मंत्री जी किशन रेड्डी ने एक प्रश्न के लिखित उत्तर में उच्च सदन को यह जानकारी दी. उन्होंने कहा कि सनाउल्ला न्यायाधिकरण के समक्ष इस बात के साक्ष्य पेश करने में विफल रहे कि 25 मार्च 1971 से पहले भारतीय भूमि से उनका पैतृक संबंध था और वह इस बात के साक्ष्य स्थापित नहीं कर पाए कि वह जन्म से भारतीय हैं.

रेड्डी ने कहा, असम में कामरूप जिले के बोको पुलिस थाना क्षेत्र के तहत ग्राम कलाहिकाश के एक सेवानिवृत्त सेनाकर्मी मो. सनाउल्ला की नागरिकता के बारे में स्थानीय पुलिस द्वारा विदेशी विषयक अधिनियम 1964 के तहत संदर्भ भेजा गया था. संदर्भ प्राप्त होने पर जनपद कामरूप, असम स्थित विदेशी विषयक न्यायाधिकरण ने सनाउल्ला को एक नोटिस जारी किया तथा उनके द्वारा प्रस्तुत दस्तावेजों एवं गवाहों की प्रक्रिया के अनुसार जांच की.”

उन्होंने कहा कि उपरोक्त न्यायाधिकरण के निर्णय का अनुसरण करते हुए सनाउल्ला को हिरासत शिविर में रखा गया. गुवाहाटी उच्च न्यायालय ने सात जून 2019 को सनाउल्ला को जमानत दे दी.