नई दिल्लीः पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की सरकार के साथ जारी तकरार के बीच सीबीआई के निदेशक ऋषि कुमार शुक्ला आज पदभार संभाल लिया. भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) के 1983 बैच के अधिकारी शुक्ला ऐसे समय में सीबीआई के निदेशक बने हैं जब एजेंसी तथा कोलकाता पुलिस के बीच विवाद ने राजनीतिक रूप ले लिया है और केन्द्र तथा पश्चिम बंगाल सरकारें एक-दूसरे के सामने खड़ी हैं. Also Read - WB Assembly Election 2021: कोलकाता में असदुद्दीन ओवैसी की रैली रद्द, बढ़ सकती है ममता बनर्जी से तकरार?

रविवार को सीबीआई के अंतरिम प्रमुख रहे एम. नागेश्वर राव की स्थिति कुछ अजीबो-गरीब हो गई और वह पश्चिम बंगाल पुलिस की इस कार्रवाई का तत्काल जवाब नहीं दे सके. पश्चिम बंगाल में न सिर्फ सीबीआई टीम को हिरासत में लिया गया बल्कि साल्ट लेक के सीजीओ परिसर स्थित एजेंसी के कार्यालय की भी घेराबंदी कर ली गई. Also Read - Kolkata Police White Dress Code: कोलकाता पुलिस क्यों पहनती है सफेद Uniform, जानें क्या है असल वजह

सीबीआई की एक टीम चिटफंड मामले में पश्चिम बंगाल पुलिस प्रमुख राजीव कुमार से पूछताछ करने रविवार को उनके आवास पहुंची थी लेकिन उन्हें बाहर ही रोक दिया गया और थोड़ी देर बाद उन्हें हिरासत में ले लिया गया. Also Read - SC की ममता सरकार को कड़ी फटकार-लाइन क्रॉस मत करो, देश को आजाद रहने दो, जानिए मामला

मध्य प्रदेश पुलिस के पूर्व डीजीपी और खुफिया विभाग के अनुभवी अधिकारी शुक्ला ने आज पूर्ण निदेशक के रूप में कार्यभार संभाल लिया.

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी केन्द्र की कथित मनमानी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तथा भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के इस कदम से उनके (ममता के) अपमान के खिलाफ रविवार शाम से धरने पर बैठी हैं. सीबीआई का एक दल शारदा और रोज वैली घोटाला मामलों में अचानक कोलकाता पुलिस प्रमुख राजीव कुमार से पूछताछ करने उनके घर पहंची, जिसके बाद इस मामले ने तूल पकड़ी.

पश्चिम बंगाल पुलिस ने सीबीआई के दल को दरवाजे पर ही रोक दिया और बाद में उन्हें थाने ले गई. राज्य पुलिस अधिकारियों ने कहा कि पश्चिम बंगाल पुलिस ने यह कदम इसलिए उठाया क्योंकि एजेंसी के अधिकारियों के पास कोई वारंट नहीं था. बनर्जी के एक करीबी सहयोगी से उनके आवास पर हाल ही में पूछताछ की गई थी. आम चुनावों के मद्देनजर जांच में तेजी कर दी गई है.

(इनपुट भाषा)