Rishikesh Rafting Ban High Court Order Policy Guidelines
ऋषिकेश में रिवर राफ्टिंग पर रोक, जानिए क्यों लिया गया ये फैसला और फिर कब शुरू होंगे वॉटर स्पोर्ट्स?
River Rafting Ban: उत्तराखंड हाईकोर्ट ने पर्यावरण और पर्यटकों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए ऋषिकेश और पूरे राज्य में रिवर राफ्टिंग समेत सभी जल-खेलों पर अस्थायी रूप से रोक लगा दी है.
Rishikesh River Rafting: उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण फैसला देते हुए ऋषिकेश और पूरे राज्य में रिवर राफ्टिंग, पैराग्लाइडिंग और अन्य जल-खेलों पर तत्काल प्रभाव से प्रतिबंध लगा दिया है. यह कदम एक जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान उठाया गया, जिसमें पर्यावरण, सुरक्षा और लाइसेंसिंग की अनियमितताओं को लेकर सवाल उठाए गए.
न्यायालय ने राज्य सरकार को केवल दो हफ्ते का समय दिया है, जिसमें इन्हें व्यवस्थित करने वाली नीति तैयार करनी होगी. न्यायालय ने पाया कि बिना किसी नियमन और नीति के, हजारों राफ्टिंग ऑपरेटर गंगा और अन्य नदियों पर लाइसेंस जारी कर कई गतिविधियां संचालित कर रहे हैं.
राफ्टिंग के दौरान दुर्घटनाएं और मौतें भी हुई
इससे नदी का पारिस्थितिक तंत्र और पर्यावरण भारी खतरे में है. हाल के वर्षो में राफ्टिंग के दौरान दुर्घटनाएं और मौतें भी हुई हैं, खासकर गंगा की तेज धाराओं में राफ्ट उलटने से. न्यायालय ने स्पष्ट कहा है कि खेल तो मनोरंजन के लिए हैं, लेकिन इन्हें तबाही में बदलने की अनुमति नहीं दी जा सकती.
राज्य सरकार को क्या करना होगा?
दो सप्ताह के भीतर ऐसी नियमावली तैयार करें, जिसमें लाइसेंस जारी करने की प्रक्रिया, सुरक्षा आवश्यकताओं, तथा पर्यावरण संरक्षण के उपाय शामिल हों. राफ्टिंग के जोखिमपूर्ण क्षेत्रों में एसडीआरएफ गोताखोर टीम, वायरलेस संचार, और आपातकालीन बचाव उपकरण जैसी व्यवस्थाएं सुनिश्चित करनी होंगी. संचालन में पारदर्शिता हो, जिससे अवैध राफ्टिंग कैंप या पर्यावरणीय नुकसान न हो.
प्रतिबंध से पर्यटन और स्थानीय आमदनी पर असर
लगभग 300 राफ्टिंग कंपनियां, जिनके तहत 1,200 से अधिक राफ्ट संचालित होते हैं, इस प्रतिबंध से अटका हुआ महसूस कर रही हैं. इन लोगों और उनके परिवारों की रोजगार पर भी असर पड़ा है. अनुमानित तौर पर, यह क्षेत्र 70 करोड़ रुपये वार्षिक कारोबार करता है, जिसमें सड़क परिवहन, होटल, गाइड, उपकरण भाड़ा, भोजन आदि सेवाएं शामिल हैं. असमय बर्खास्तगी व्यवसाय पर भारी प्रभाव डाल सकती है.
स्थानीय लोगों की माने तो प्रतिबंध पर्यावरण सुरक्षा के लिए जरूरी है, लेकिन इस अधिनियम को लागू करने से पहले एक धारा और वैकल्पिक रोजगार के प्रबंध भी जरूरी हैं .
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वैज्ञानिक और प्रशासनिक दृष्टिकोण
एक न्यायाधीश के सदन ने यह मुख्य रूप से इस आधार पर प्रतिबंध लगाया कि किसी स्पष्ट नियमन के बिना, राफ्टिंग और कैंपिंग पर्यावरण और मानव जीवन दोनों के लिए जोखिम पैदा कर रही है. सिर्फ प्रदेश सरकार नहीं, बल्कि NGT और हाईकोर्ट दोनों ने जल-खेलों के कारण उत्पन्न पर्यावरणीय प्रभावों- जैसे नदी प्रदूषण, कूड़ा प्रबंधन की कमी, नवीनीकरण की समस्याओं पर चिंता जताई है.
क्या होंगे अगले कदम?
राज्य सरकार दो सप्ताह के अंदर नीति लाईन जारी करेगी- जहां लाइसेंसिंग, सुरक्षा मानक, पर्यावरणीय जिम्मेदारी और आपातकालीन व्यवस्था जैसे मुद्दे स्पष्ट होंगे. NGT/हाईकोर्ट इस नीति की सिविल और कानूनी समीक्षा करेगा और फिर तय करेगा कि स्थानीय कंपनियों को पुनः संचालन की अनुमति मिले या नहीं.
गतिविधियों को डेंजर जोन जैसे कौडियाला, मरीन ड्राइव, ब्रह्मपुरी के क्षेत्रों में प्रारंभिक रूप से सीमित रखा जा सकता है, जहां पहले से ही SDRF और गोताखोर तैनात हैं.
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