नई दिल्लीः आर्मी चीफ जनरल बिपिन रावत ने मंगलवार को कहा कि ऐसा माना जाता है कि पूरा रक्षा बजट सेना पर खर्च होता है, जबकि ऐसा नहीं है. सेना को मिलने वाले कुल बजट का 35 फिसदी हिस्सा राष्ट्र निर्माण के योगदान पर खर्च होता है. उन्होंने कहा कि जब सीमाओं पर आधारभूत संरचना मजबूत होती है तो हम बॉर्डर से दूर रहने वाले लोगों से जुड़ाव महसूस करते हैं. यह पूरे राष्ट्र को जोड़ने का काम करता है.Also Read - Petrol Price Hiked: पाकिस्तान में पेट्रोल के दाम में 10.49 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी, सोशल मीडिया पर फूटा गुस्सा

Also Read - Attacks on Hindu Temples in Bangladesh: इस्कॉन ने PM मोदी से की अपील, कहा- हिंंसा रुकवाने बांग्लादेश में भेजें प्रतिनिधिमंडल

बिपिन रावत ने कहा कि चीन अपनी अर्थव्यवस्था का एक बड़ा हिसा सैन्य ताकत पर खर्च करता है. यही कारण है कि आज चीन अमेरिका को भी चुनोती दे रहा है. चीन अपनी सैन्य ताकत और अर्थव्यवस्था पर समान रूप से ध्यान देता है. इसी का नतीजा है कि आज दुनिया के अंतरराष्ट्रीय बॉर्डर पर चीन मजबूती के साथ खड़ा दिखाई देता है. Also Read - T20 World Cup 2021: "पाकिस्तान को मदद करेंगी UAE की अनुकूल परिस्थितियां"

आर्मी चीफ ने कहा कि ऐसा सोचा जाता है कि रक्षा पर खर्च किया गया बजट देश पर बोझ है. कुछ लोग कहते हैं कि सेना पर खर्च करने से देश को कुछ नहीं मिलता, जबकि ऐसा मानना बिल्कुल ही गलत है. उन्होंने कहा कि अगर रक्षा पर खर्च बढ़ेगा तो इससे देश की अर्थव्यवस्था को और मजबूती मिलेगी.

उन्होंने कहा कि अर्थव्यवस्था और सैन्य सुरक्षा, दोनों एकदूसरे के पूरक हैं. आर्मी चीफ ने कहा कि भारत-चीन के बीच हर साल होने वाला हैंड इन हैंड सैन्य अभ्यास फिर शुरू होगा. डोकलाम विवाद के बाद दोनों देशों के रिश्ता में आई खटास दूर हो रही है.

पाकिस्तान के मुद्दे पर आर्मी चीफ ने कहा कि अगर पाकिस्तान सीमा पार से गतिविधियों को बढ़ाता हैं तो हमारे पास अगले लेवल पर जाने का विकल्प है. सीमा पार बैठे लोगों को हमसे ज्यादा नुकसान झेलना पड़ रहा है. उन्होंने कहा कि हमने यह सुनिश्चित किया है कि किसी भी कार्रवाई में पाकिस्तान का बराबर का नुकसान हो. आर्मी चीफ ने कहा कि हम बॉर्डर पर विकास कार्य करके सुदूर इलाकों में बसे लोगों को जोड़ते हैं.