
Aditya Dwivedi
Senior Correspondent at India.com. Alumni of Indian Institute of Mass Communication, New Delhi. Love to follow Politics, Sports and Culture. ... और पढ़ें
नई दिल्ली। केंद्र ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल करके कहा कि रोहिंग्या मुस्लिम शरणार्थी देश में ‘गैरकानूनी’ हैं और उनका लगातार यहां रहना ‘राष्ट्र की सुरक्षा के लिये गंभीर खतरा’ है. लेकिन इस तर्क पर जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने सवाल खड़े किए हैं. उन्होंने ट्वीट में लिखा, ‘यह खतरा है, अगर ऐसा है तो जम्मू-कश्मीर में ऐसा 2014 के बाद ही हुआ होगा. पहले तो यूनिफाइट हेडक्वार्टर मीटिंग में इस तरह की कोई इंटेलिजेंस रिपोर्ट सामने नहीं आई.’
This threat, at least in J&K, is a post 2014 development. No such intelligence reports ever came up for discussion in Unified HQ meetings. https://t.co/xLM0qWQBXL
— Omar Abdullah (@OmarAbdullah) September 18, 2017
गौरतलब है कि केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री में सोमवार को इस मामले में एक हलफनामा दाखिल किया जिसमे कहा गया है कि सिर्फ देश के नागरिकों को ही देश के किसी भी हिस्से में रहने का मौलिक अधिकार है और गैरकानूनी शरणार्थी इस अधिकार के लिये सुप्रीम कोर्ट के अधिकार क्षेत्र का इस्तेमाल नहीं कर सकते.
केंद्र ने अपने हलफनामे में साथ ही कहा, ‘जम्मू, दिल्ली, हैदराबाद और मेवात में सक्रिय रोहिंग्या शरणार्थियों के आतंकी कनेक्शन होने की भी खुफिया सूचना मिली है. वहीं कुछ रोहिंग्या हुंडी और हवाला के जरिये पैसों की हेरफेर सहित विभिन्न अवैध व भारत विरोधी गतिविधियों में शामिल पाए गए.’
म्यांमार की सेना द्वारा बडे़ पैमाने पर रोहिंग्या मुसलमानों पर कथित रूप से अत्याचार किये जाने की वजह से इस समुदाय के लोगों ने म्यांमार के पश्चिम राखिन प्रांत से पलायन कर भारत और बांग्लादेश में पनाह ली है. भारत आने वाले रोहिंग्या मुस्लिम जम्मू, हैदराबाद, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और दिल्ली- राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र व राजस्थान में रह रहे हैं.
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