वॉशिंगटन। भारत और अमेरिका के बीच नई दिल्ली में पहली ‘टू प्लस टू’ वार्ता के दौरान चीन को लेकर भी चर्चा हुई थी. वार्ता में भारत-प्रशांत क्षेत्र में चीन की भूमिका और समुद्र और आसमान को सुरक्षित करने के लिए अन्य क्षेत्रीय पक्षों के साथ मिलकर काम करने के तौर-तरीकों पर चर्चा की. डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने सोमवार को यह जानकारी दी. बता दें कि वार्ता को लेकर चीन ने कहा था कि वह इस बातचीत का स्वागत करता है हालांकि रक्षा सौदे पर चुप्पी साध ली थी. Also Read - भारत की मेजबानी में 30 नवंबर को एससीओ नेताओं की बैठक में भाग लेंगे चीन के प्रधानमंत्री

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चीन ने की भारत-अमेरिका टू प्लस टू बातचीत की तारीफ, रक्षा समझौते पर चुप्पी Also Read - भारत ने US से लीज पर लिए बेहद खतरनाक Predator Drones, चीन से निपटने को LAC पर हो सकती है तैनाती

विदेश मंत्री सुषमा स्वराज और रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने छह सितंबर को अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोम्पिओ और रक्षा मंत्री जेम्स मैटिस के साथ अहम वार्ता की थी. दक्षिण एवं मध्य एशिया के लिए प्रधान उप सहायक विदेश मंत्री एलिस वेल्स ने सोमवार को कहा कि भारत प्रशांत क्षेत्र के लिए दोनों देशों की दृष्टि के संदर्भ में चीन पर चर्चा हुई.

वेल्स ने एक सवाल के जवाब में कहा कि देशों को विकास के लिए विकल्प की पेशकश में सक्षम होने को लेकर अमेरिका और भारत के लिए अवसर के रूप में हमने भारत-प्रशांत पर चर्चा की.

कई मुद्दों पर बनी सहमति

दिल्ली में भारत-अमेरिका के बीच टू प्लस टू वार्ता में दोनों देशों के बीच आतंकवाद सहित कई मुद्दों पर सहमति बनी थी. भारत और अमेरिका के बीच पहली बार हुई टू प्लस टू वार्ता का उद्देश्य द्विपक्षीय रक्षा और सुरक्षा साझेदारी को और मजबूत करना और भारत-प्रशांत क्षेत्र में वैश्विक रणनीतिक सहयोग को विशेषतौर पर बढ़ाना था.

विदेश मंत्री सुषमा स्वराज और रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने टू प्लस टू वार्ता के तहत अमेरिकी विदेश मंत्री माइकल आर पोम्पिओ और रक्षा मंत्री जेम्स मैटिस से बातचीत की. बता दें कि अमेरिका भारत के साथ सैन्य सहयोग बढ़ाने का प्रयास कर रहा है, जिसे क्षेत्र में चीन के बढ़ते सैन्य प्रभुत्व के संतुलन के प्रयास के तौर पर देखा जा रहा है.