नई दिल्ली/कानपुरः रोटोमैक पेन के प्रमोटर विक्रम कोठारी के खिलाफ 800 करोड़ रुपए का कर्ज नहीं चुकाने के मामले में बैंक ऑफ बड़ौदा की तरफ से दी गई शिकायत पर सीबीआई ने केस दर्ज कर लिया है. जांच एजेंसी ने सोमवार सुबह कानपुर में कोठारी के घर और दफ्तरों पर छापे मारे. सीबीआई प्रवक्ता अभिषेक दयाल ने स्पष्ट रूप से कहा कि इस मामले में अब तक कोई गिरफ्तारी नहीं हुई है. उन्होंने कहा कि छापेमारी की कार्यवाही के दौरान कोठारी, उनकी पत्नी और बेटे से पूछताछ की गई. Also Read - Bird flu in Uttar Pradesh: कानपुर का चिड़ियाघर बंद, मुर्गे-मुर्गी मारे जा रहे हैं, कोरोना वायरस वाला प्रोटोकॉल लागू

Also Read - रणजी ट्रॉफी, विजय हजारे टूर्नामेंट के लिए UP के संभावित खिलाड़ियों की सूची से बाहर हुए सुरेश रैना, भुवनेश्वर कुमार

सूत्रों के मुताबिक कोठारी पर इलाहाबाद बैंक, बैंक ऑफ इंडिया और यूनियन बैंक ऑफ इंडिया समेत कई सार्वजनिक बैंकों को नुकसान पहुंचाने का आरोप है. कानपुर के कारोबारी कोठारी ने पांच सार्वजनिक बैंकों से 800 करोड़ रुपये से अधिक का ऋण लिया था. Also Read - UP के Kanpur में अंतरराज्यीय सट्टा गिरोह का भंडाफोड़, 2 करोड़ रुपए नकद बरामद

सूत्रों के अनुसार कोठारी को ऋण देने में इलाहाबाद बैंक, बैंक ऑफ इंडिया, बैंक ऑफ बड़ौदा, इंडियन ओवरसीज बैंक और यूनियन बैंक ऑफ इंडिया ने नियमों के पालन में ढिलाई की. पहले ऐसी खबर आई जिसमें बताया गया कि कोठारी संभवतः विदेश भाग गए हैं. स्थानीय मीडिया की रपटों के अनुसार कंपनी के प्रमोटर ने उनके विदेश भाग जाने की आशंकाओं को आधारहीन करार दिया है.

कोठारी ने कहा, ‘मैं कानपुर का वासी हूं और मैं शहर में ही रहूंगा. हालांकि कारोबारी काम की वजह से मुझे विदेश यात्राएं भी करनी होती हैं.’ रोटोमैक कंपनी के मालिक विक्रम कोठारी रविवार, 18 फरवरी को एक वैवाहिक समारोह में शामिल होने कानपुर कैंट पहुंचे थे, तो समारोह स्थल के बाहर मीडियाकर्मियों ने उनसे 5 हजार करोड़ के ऋण हासिल करने पर सवाल किया. कोठारी ने सवाल का न तो जवाब दिया और न ही वो पल भर के लिए रुके.

कोठारी ने एक हाथ से न्यूज चैनलों के माइक हटाए और दूसरे हाथ से मोबाइल फोन कान से लगाया. उन्होंने मीडिया को नजरअंदाज करने की पूरी कोशिश की. इसके बाद वे गाड़ी में बैठकर वहां से निकल गए. कोठारी ने 30 सेकेंड का अपना बयान रिकॉर्ड कर जारी किया दिया है. इस वीडियो में वे मीडिया रिपोर्टों को गलत साबित करते हुए कह रहे हैं कि उनके बैंक लोन का मामला एनसीएलटी के समक्ष विचाराधीन है और वे देश छोड़कर कहीं नहीं जा रहे हैं. आखिर में ये बोलते भी सुनाई पड़ रहे हैं कि उनका भारत महान है.

नीरव मोदी से पहले इन शातिर कारोबारियों ने देश के वित्तीय तंत्र को लगाया था चूना

नीरव मोदी से पहले इन शातिर कारोबारियों ने देश के वित्तीय तंत्र को लगाया था चूना

कोठारी रोटोमैक पेन कंपनी के प्रमोटर हैं. सूत्रों के मुताबिक कोठारी पर इलाहाबाद बैंक, बैंक ऑफ इंडिया और यूनियन बैंक ऑफ इंडिया समेत कई सार्वजनिक बैंकों को नुकसान पहुंचाने का आरोप है. कानपुर के कारोबारी कोठारी ने पांच सार्वजनिक बैंकों से 800 करोड़ रुपए से अधिक का ऋण लिया था. कोठारी ने यूनियन बैंक ऑफ इंडिया से 485 करोड़ रुपये और इलाहाबाद बैंक से 352 करोड़ रुपये का ऋण लिया था. उन्होंने ऋण लेने के साल बाद कथित तौर पर ना तो मूलधन चुकाया और ना ही उस पर बना ब्याज.

पिछले साल ऋण देने वाले बैंकों में शामिल बैंक ऑफ बड़ौदा ने रोटोमैक ग्लोबल प्राइवेट लिमिटेड को जानबूझकर ऋणचूक करने वाला (विलफुल डिफॉल्टर) घोषित किया था. इस सूची से नाम हटवाने के लिए कंपनी ने इलाहाबाद हाई कोर्ट की शरण ली थी, जहां मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति डी.बी.भोसले और न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा की खंडपीठ ने कंपनी की याचिका पर सुनवाई करते हुए उसे सूची से बाहर करने का आदेश दिया था.

न्यायालय ने कहा था कि ऋण चूक की तारीख के बाद कंपनी ने बैंक को 300 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति की पेशकश की थी, बैंक को गलत तरीके से सूची में डाला गया है. बाद में रिजर्व बैंक द्वारा तय प्रक्रिया के अनुसार एक प्राधिकृत समिति ने 27 फरवरी 2017 को पारित आदेश में कंपनी को जानबूझ कर ऋण नहीं चुकाने वाला घोषित कर दिया. यह जानकारी ऐसे समय सामने आयी है जब महज एक सप्ताह पहले पंजाब नेशनल बैंक में करीब 11,400 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी खुलासा हुआ है.