नई दिल्ली: राफेल डील को लेकर राहुल गांधी और नरेन्द्र मोदी के बीच शुरु हुई जुमलेबाजी खत्म होती नहीं दिखा रही है. प्रधानमंत्री मोदी पर आज पलटवार करते हुए कांग्रेस ने आज आरोप लगाया कि मोदी सरकार कुछ पूंजीपतियों के हितों के लिए काम कर रही है न कि जनता की भलाई के लिए. Also Read - शिवराज चौहान ने पूछा- क्या राहुल गांधी की कांग्रेस अलग है और कमलनाथ की कांग्रेस अलग?

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गौरतलब है कि शुक्रवार को राहुल गांधी ने ट्वीट के जरिये कहा था कि राफेल डील की आड़ में “मिस्टर 56 के दोस्तों” को 20 बिलियन का लाभ हुआ है. गांधी ने ट्विटर पर लिखा कि वो अपने पहले ट्वीट में मिस्टर 56 के दोस्तों को मिलने वाले 16 बिलियन के फायदे को जोड़ना भूल गए थे

50 सालों तक एक लाख डॉलर होंगे चुकाने

राहुल ने आगे  ट्वीट किया कि सरकार ने फ्रांस से जो समझौता किया है उसके लिए देश की जनता को आने वाले 50 सालों तक 1,00,000 डॉलर चुकाने होंगे और रक्षा मन्त्री इस बात को नकार देंगीं.

उद्योगपतियों के बगल में खड़े रहने से डरते हैं कांग्रेसी

उद्योग जगत के लोगों की कथित आलोचना को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की आलोचना की थी. प्रधानमंत्री मोदी ने कल राहुल गांधी और कांग्रेस पर इशारों-इशारों में निशाना साधते हुए कहा था, “हम वो लोग नहीं हैं जो उद्योगपतियों के बगल में खड़े रहने से डरते हैं। कुछ लोगों को आपने देखा होगा उनकी एक फ़ोटो नहीं निकाल सकते उद्योगपति के साथ. लेकिन देश का एक उद्योगपति ऐसा नहीं होगा, जिनके घरों में जाकर साष्टांग दंडवत न किए हों.”

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बचाव में दिया महात्मा गांधी का उदाहरण

प्रधानमंत्री ने कहा, “जब नीयत साफ़ हो और इरादे नेक हों तो किसी के भी साथ खड़े होने से दाग़ नहीं लगते। महात्मा गांधी जी का जीवन इतना पवित्र था कि उन्हें बिड़ला जी के परिवार के साथ जाकर रहने, बिड़ला जी के साथ खड़े होने में कभी संकोच नहीं हुआ.

पूंजीपतियों के हित में काम कर रही सरकार

कांग्रेस के संगठन महासचिव अशोक गहलोत ने आज ट्वीट कर कहा, ‘मोदी सरकार जनता के कल्याण के लिए काम नहीं कर रही है, बल्कि कुछ पूंजीपतियों के हित में काम कर रही है.’

पार्टी के वरिष्ठ नेता अहमद पटेल ने भी प्रधानमंत्री पर निशाना साधा और कहा, ‘उद्योगपतियों के साथ खड़ा होना अच्छी बात है लेकिन साथ खड़े होकर केवल दो लोगों के हितों और पार्टी की आमदनी बढ़ाने का ख्याल करना नहीं, बल्कि देश और युवा के भविष्य के बारे में भी सोचना ज़रूरी है.’

12 दिन पुरानी कम्पनी को क्यों मिली वरीयता

गौरतलब है कि 23 सितम्बर 2016 को 36 राफेल जेट खरीदने के लिए भारत और फ्रांस के बीच समझौता हुआ था. पर शुरु से ही कांग्रेसी इस डील पर सरकार द्वारा 51 साल पुरानी एचएएल को कॉन्ट्रैक्ट में शामिल न कर 12 दिन पुरानी रिलायंस डिफेन्स लिमिटेड को गलत तरीके से फायदा पहुंचाने का आरोप  लगा कर सवालिया निशान लगाते रहे हैं. खुद भाजपाई नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने डील को भ्रष्टाचार के आरोप में कोर्ट में चुनौती देने की बात कही थी.