नई दिल्लीः मध्य प्रदेश और छ्त्तीसगढ़ में सरकार बनने के साथ कांग्रेस के मुख्यमंत्रियों ने किसानों की कर्ज माफी का वादा पूरा कर दिया. लेकिन राजस्थान की कांग्रेस सरकार के लिए यह मसला इतना आसान नहीं दिख रहा है. राजस्थान पर तीन लाख करोड़ रुपये से अधिक का कर्ज है, ऐसे में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की सरकार के लिए वादों को पूरा करना एक डेढ़ी खीर दिख रही है. हालांकि, गहलोत ने कैबिनेट की पहली बैठक के बाद इस बात को दोहराया कि उनकी सरकार वादे के मुताबिक 10 दिन के भीतर किसानों का कर्ज माफ कर देगी. उन्होंने कहा कि पहली कैबिनेट बैठक के बाद ये दिन गिने जाएंगे.

इकोनॉमिक टाइम्स अखबार में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक किसानों के एक नेता अमराराम ने कहा कि राज्य में किसानों पर करीब एक लाख करोड़ रुपये का कर्ज है. उन्होंने कहा कि कांग्रेस की सरकार ने किसानों का पूरा लोन माफ करने का वादा किया है. ऐसा करने पर राजकोष पर करीब एक लाख करोड़ रुपये का बोझ पड़ेगा. सोमवार को ही मध्य प्रदेश में सरकार की बागडोर संभालने वाले मुख्यमंत्री कमलनाथ ने किसानों के दो लाख रुपये तक के कर्ज माफ करने की घोषणा की थी.

मध्यप्रदेश के बाद छत्तीसगढ़ की नई सरकार ने भी किसानों का कर्ज माफ करने का एलान किया

किसान नेता अमराराम ने कहा कि किसान वादे के मुताबिक 10 दिन के भीतर लोन माफ करने की घोषणा का इंतजार कर रहे हैं. अगर ऐसा नहीं होता है तो वे वैसा ही आंदोलन करेंगे जैसा पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे की सरकार में उन्होंने किया था. कृषि अर्थशास्त्री राकेश भारद्वाज का भी कहना है कि सरकार चुनावी घोषणापत्र के मुताबिक किसानों के पूरे लोन माफ नहीं कर सकती, लेकिन वह ऐसा करती है तो इससे आने वाले समय में राज्य के खजाने की स्थिति और बुरी होगी.

बैंक कमेटी की मार्च 2018 की रिपोर्ट के मुताबिक राजस्थान में करीब 59 लाख किसानों ने लोन लिया है. इसमें से करीब 26 लाख किसानों ने सहकारी और ग्रामीण बैंकों से लोन लिया, जबकि 24 लाख ने राष्ट्रीय व अन्य व्यावसायिक बैंकों से लोन लिया. सहकारी बैंक के एक वरिष्ठ अधिकारी ने अनुमान के मुताबिक लोन माफी के लिए गहलोत सरकार को शुरुआत में 22 हजार करोड़ की जरूरत पड़ेगी. इसके बाद इसका दायरा बढ़ता जाएगा. राज्य के किसानों पर करीब 90 हजार करोड़ रुपये के लोन बकाया है.