नई दिल्‍ली: राष्‍ट्रीय स्‍वयं सेवक ने अपने इतिहास में स्‍वयं सेवकों का अब तक का सबसे बड़ा सम्‍मेलन मेरठ में करके अपनी पुरानी लाइन ‘कट्टर हिंदुत्‍व’ के दम पर ही आगे बढ़ने का साफ संदेश दिया है. रविवार को राष्ट्रोदय समागम में संघ प्रमुख मोहन भागवत ने अपने 34 मिनट के भाषण में देश में चल रही धर्म निरक्षेपता बनाम धर्म पर आधारित राजनीति की बहस के बीच साफ कर दिया है कि संघ अपनी पुरानी लाइन पर ही चलेगा और संगठन के विस्‍तार के लिए समाज के कई धड़ों को अपने साथ एकजुट करके जोड़ने की रणनीति पर काम करेगा. भागवत ने संघ पर अक्‍सर उठाए जाने वाले सवालों के साथ ही कई अन्‍य बातों पर संगठन की लाइन एकदम साफ कर दी है. संघ अपने इस विशाल समागम के जरिए देश में सत्‍ता से लेकर निचले व्‍यक्‍ति तक अपनी मजबूत पकड़ बनाना चाहता है. Also Read - Delhi- NCR समेत यूपी और हरियाणा के इन शहरों में बारिश का अलर्ट, छाए रहेंगे बादल

‘कट्टर हिंदुत्‍व’ को सही ठहराया
संघ प्रमुख ने अपने भाषण में संगठन के ‘कट्टर हिंदुत्‍व’ की अवधारणा को उच्‍च मूल्‍यों से जोड़ते हुए कहा, कट्टर हिन्दुत्व का अर्थ कट्टर सत्य निष्ठा और कट्टर अहिंसा का पालन करने वाला. कट्टरता उदारता के लिए है. उन्‍होंने कहा, हम हिंदू कट्टर होंगे तो अधिक विविधताओं को समाहित करेंगे. Also Read - Unlock 2: यूपी में स्कूल 31 जुलाई तक बंद, मेरठ मंडल में रात आठ से सुबह छह तक कर्फ्यू

हिंदुत्‍व में वसुधैव कुटुम्बकम
आरएसएस प्रमुख भागवत ने कहा, हमारा देश एक है, क्योंकि हमारे यहां वसुधैव कुटुम्बकम के मंत्र पर लोग चलते हैं. हम वसुधैव कुटुम्बकम का मंत्र लेकर चलने वाले लोग हैं. Also Read - Coronavirus: नोएडा, गाजियाबाद समेत यूपी के इन 6 शहरों में रात के कर्फ्यू का समय बढ़ा

हिंदुत्‍व’ को बताया समाज की जरूरत
संघ प्रमुख ने कहा, संपूर्ण समाज को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़ना पड़ेगा, तभी समाज का उत्थान हो पाएगा. समाज के उत्थान के लिए और उसके विकास के लिए हर समुदाय के लोगों को स्वयंसेवक बनने की जरूरत है.

संघ की ताकत इशारे में बताई
कुछ समय पहले स्‍वयं सेवकों को सेना जैसे संगठित करने वाले बयान के बाद मेरठ में संघ प्रमुख ने अपने विशाल संगठन की ताकत का भी इशारा कर दिया. उन्‍होंने कहा, कार्यक्रम शक्ति प्रदर्शन करने के लिए नहीं करते, क्योंकि शक्ति होती है तो उसे दिखाने की जरूरत नहीं होती.

राष्‍ट्रवाद, हिंदुत्‍व और सेवा
संघ प्रमुख ने अपने भाषण में कहा, पूरी दुनिया को समय-समय पर धर्म देने वाला हमारा देश है. भारतीय माता को अपनी माता मानने वाला हिंदू है.उन्‍होंने कहा, स्वयंसेवक 1 लाख 70 हजार से ज्यादा सेवा कार्य कर रहे हैं.

मेरठ में रविवार को विशाल समागम में संघ प्रमुख मोहन भागवत ने अपने 34 मिनट भाषण देते हुए संगठन की हिंदुत्‍व की अवधारणा को साफ किया. फोटो साभार- (एएनआई)

हिंदू एकता और जागरुकता
संघ प्रमुख ने कहा, हम हिंदू हैं इसलिए हम एक हैं. दुनिया मानती है कि एक होने के लिए एक सा होना पड़ेगा. सृष्टि के रंग अलग-अलग हैं लेकिन रूप एक ही है. हमारे देश में हिंदू लोग हैं लेकिन वो जानते नहीं कि वो हिंदू हैं. हिंदुओं को एक होना होगा. हिंदुओं के पास कहीं और दूसरी जगह जाने के लिए नहीं है. हम दायित्यवान लोग हैं और हमें जवाब देना होगा.

संघ की देशसेवा और हिंदू समाज का दायरा
भागवत ने कहा, जब कभी देश पर संकट आता है तो स्वयंसेवक वहां पहुंचते हैं और प्राणों की चिंता किए बगैर राष्ट्र के लिए अपना जीवन दांव पर लगा देते हैं. वहीं, उन्‍होंने हिंदू होने के दायर को व्‍यापक बताते हुए कहा कि हमारे देश के पूजा करने वाले लोग और पूजा नहीं करने वाले लोग, कई भाषाओं को बोलने वाले लोग और हजारों जातियों में खुद को गिनने वाले लोगों का एक ही धर्म है. संघ प्रमुख ने कहा, जात-पात में बंटकर लड़ाई करते हैं. हमारे झगड़े पर लोग स्वार्थ की रोटी सेंकते हैं. इसे रोकना है तो हर हिंदु हमारा भाई है ऐसा सोचना और कहना होगा.

संघ का मकसद
– 2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा की वापसी
– 80 लोकसभा सीटों वाले राज्‍य उप्र में संगठन को और मजबूत करना
– हिंदुत्‍व के आधार पर समाज के विभिन्‍न धड़ों को संघ के पक्ष में लाना
– प्रदेश में संगठन के स्‍तर पर बीजेपी को मजबूती देने की जमीन तैयार करना

मेरठ में सम्‍मेलन के मायने
पश्चिमी उत्‍तर प्रदेश साम्‍प्रदायिक दृष्‍टि से बेहद संवेदनशील है और यहां पर धार्मिक आधार पर वोटों का ध्रुवीकरण आसानी से हो जाता है. लेकिन संघ इस इलाके में सहारनपुर जैसे जातीय दंगों से हिंदू समाज के धड़ों में बंटने पर चिंतित है.