नई दिल्ली: कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी बीजेपी के साथ-साथ आरएसएस पर भी तीखे हमले बोलते रहे हैं. अपने भाषणों में राहुल गांधी ने कई मौकों पर आरएसएस को खरी-खरी सुनाई है. हाल ही में अपने विदेश दौरे पर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की तुलना अरब जगत के इस्लामी संगठन मुस्लिम ब्रदरहुड से की थी और आरोप लगाया था कि आरएसएस भारत के स्वभाव को बदलने और इसकी संस्थाओं पर कब्जा करने की कोशिश कर रहा है. मुस्लिम ब्रदरहुड अरब जगत में सबसे पुराना राजनीतिक इस्लामी संगठन है. अरब के कुछ देशों में इसे आधिकारिक राजनीतिक पार्टी के तौर पर काम करने की इजाजत नहीं है.Also Read - राहुल गांधी का केंद्र पर बड़ा हमला, कहा- आंदोलन में जान गंवाने वाले 700 किसानों के परिजनों के बारे में सोचें पीएम, मुआवजा दें

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राहुल गांधी के तीखे हमले के बाद आरएसएस ने संघ को समझने के लिए राहुल गांधी को आमंत्रित करने का फैसला किया है. सूत्रों के मुताबिक 17-19 सितंबर के बीच ‘भविष्य का भारत-आरएसएस का दृष्टिकोण’ विषय पर संघ दिल्ली के विज्ञान भवन में संवाद कार्यक्रम करने जा रहा है. बताया जा रहा है कि आरएसएस के इस कार्यक्रम में हिस्‍सा लेने के लिए इनमें से किसी भी दिन राहुल गांधी को आमंत्रित किया जा सकता है. बताया जा रहा है कि राहुल समेत कई दलों के प्रमुखों को बुलावा भेजा जाएगा.

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सूत्रों का यह भी कहना है कि राहुल गांधी को आरएसएस चीफ मोहन भागवत से सवाल पूछने के लिए भी आमंत्रित किया जाएगा. इस संबंध में आरएसएस के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख अरुण कुमार ने कहा कि मोहन भागवत देश के प्रबुद्ध नागरिकों से ‘भविष्य का भारत-आरएसएस का दृष्टिकोण’ विषय पर 17 से 19 सितंबर तक दिल्ली के विज्ञान भवन में संवाद करेंगे.

गौरतलब है कि लंदन स्थित थिंक टैंक अंतरराष्ट्रीय सामरिक अध्ययन संस्थान (आईआईएसएस) को संबोधित करते हुए राहुल ने आरएसएस पर आरोप लगाया कि वह भारत के स्वभाव को बदलने और इसकी संस्थाओं पर कब्जा करने की कोशिश कर रहा है. राहुल ने कहा था कि आरएसएस भारत के स्वभाव को बदलने की कोशिश कर रहा है. अन्य पार्टियों ने भारत की संस्थाओं पर कब्जा करने की कोशिश नहीं की. उन्होंने कहा था कि आरएसएस का विचार अरब जगत में मुस्लिम ब्रदरहुड के विचार जैसा ही है.

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राहुल के बयान के बाद कांग्रेस ने कहा था कि पार्टी अध्यक्ष के बयान को संदर्भ के साथ देखा जाना चाहिए. पार्टी के वरिष्ठ प्रवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा था कि किसी भी वक्तव्य को संपूर्ण रूप में और संदर्भ के साथ देखना चाहिए. अतिवादी विचार के बारे में बात करते हुए उन्होंने उदाहरण के तौर पर कुछ कहा. वह महिलाओं को अलग-थलग रखने के संदर्भ में बात कर रहे थे. ‘मैं समझता हूं कि इसमे कोई गलत बात नहीं है कि जिस तरह आरएसएस कई सारे अतिवादी रुख अपनाता है, उसी तरह दूसरे धर्मों से संबंधित कई संस्थाएं भी रुख अपनाती हैं. अगर आप एक वाक्य को ऐसे उठाकर विकृत करेंगे तो वह तो विकृत होगा ही.