नई दिल्लीः हिंदी हार्ट लैंड यानी मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव में भाजपा को मिली हार पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ में मंथन शुरू हो गया है. संघ के मुखपत्र ऑर्गनाइजर (Organiser) ने इस बारे में संपादकीय लिखा है. इसमें कहा गया है कि देश भर में अब भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जादू कायम हैं और इन चुनावों में ‘एंटी-मोदी’ जैसी कोई भावना नहीं थी. मुखपत्र का दावा है कि इन तीनों राज्यों में भाजपा आरक्षण के मसले पर उलझ गई. आरक्षण के मसले की गलत व्याख्या कर उसे खूब प्रचारित किया गया. इससे आरक्षण के विरोधी और समर्थक दोनों भाजपा से नाराज हो गए.Also Read - समीर वानखेड़े ने मुंबई पुलिस कमिश्‍नर को लिखा पत्र, मुझे गलत उद्देश्यों से फंसाने के लिए कोई कानूनी कार्रवाई न की जाए

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संपादकीय में कहा गया है, ‘यद्धपि कुछ लोगों ने इसे मोदी सरकार के अंत के रूप में पेश करना शुरू कर दिया है और कुछ लोग इसे राहुल गांधी की जीत के रूप में पेश कर रहे हैं. लेकिन वास्तव में इस चुनाव ने राजनीतिक दलों और राजनीति के जानकारों के सामने कई सवाल खड़ा कर दिए हैं. वैसे संबंधित राजनीतिक दल, राजनीति के जानकार और जनता इस चुनाव के नतीजों का अपने-अपने हिसाब से मतलब निकाल रहे हैं.’

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इसमें आगे कहा गया है कि इस चुनाव के नतीजों से जो संदेश निकले हैं वो भाजपा के लिए ज्यादा जटिल हैं. लेकिन यह अब भी स्पष्ट है कि मजबूत सत्ता विरोधी लहर के बावजूद जिस तरह से मध्य प्रदेश और राजस्थान में अपने आप को संभालने में कामयाब हुई, उससे पता चलता है कि अभी मोदी विरोधी कोई हवा नहीं है. संपादकीय में लिखा गया है कि खेती-किसानी की समस्या वास्तविक है, लेकिन यदि जीत के पीछे यही एक अहम मुद्दा है तो फिर भाजपा को करीब-करीब 50 फीसदी ग्रामीण इलाकों में जीत नहीं हासिल होती. दरअसल, इस चुनाव में भाजपा आरक्षण को लेकर बनाई गई गलत धारण में उलझ गई और उसे इसके विरोधियों और समर्थकों दोनों की नाराजगी झेलनी पड़ी.

संपादकीय के मुताबिक राजस्थान के शेखावटी इलाके, मध्य प्रदेश के महाकौशल इलाके और छत्तीसगढ़ के मध्य इलाके में भाजपा को मिली हार इसके संकेत देते हैं. तीनों राज्यों में ये इलाके भाजपा के गढ़ माने जाते रहे हैं. इसमें कहा गया है कि इन इलाकों में भाजपा विरोधी मत एकजुट हो गए जबकि भाजपा के समर्थकों ने चुप्पी साध ली.