नई दिल्ली: सरकार ने राज्यसभा के सभापति और लोकसभा अध्यक्ष को पत्र लिखकर सूचना के अधिकार (संशोधन) विधेयक (RTI Amendment Bill), 2019 को एक विभाग संबंधी संसदीय स्थाई समिति को नहीं भेजने का अनुरोध किया था. यह बात आरटीआई कानून के तहत फाइलों को देखने वाली एक कार्यकर्ता ने सोमवार को कही. Also Read - बंगाल चुनाव से पहले हेमा मालिनी का बड़ा बयान, कहा- भाजपा के सत्ता में आने पर ही लोगों का जीवन सुधरेगा

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आरटीआई कार्यकर्ता अंजलि भारद्वाज ने सूचना का अधिकार (संशोधन) अधिनियम के पारित होने से संबंधित फाइलों का ब्योरा मांगा था. कानून में आरटीआई के मामलों के निर्णायकों, सूचना आयुक्तों के कार्यकाल और वेतन ढांचे में व्यापक बदलाव के प्रावधान हैं जिससे उनकी स्वायत्तता कम होने के आरोप लगने लगे थे. Also Read - भाजपा ने बंगाल सरकार पर लगाया आरोप, कहा- नहीं बांटने दिया जा रहा है पार्टी कार्यकर्ताओं को राहत सामग्री

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भारद्वाज को विधेयक से संबंधित फाइलें देखने की अनुमति दे दी गयी. उन्होंने अपने बयान में कहा कि कार्मिक राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने लोकसभा अध्यक्ष और राज्यसभा के सभापति को पत्र लिखकर उन प्रावधानों में ढील की मांग की थी जिनके तहत कोई विधेयक पेश करने के लिए पूर्व नोटिस देना तथा इसे पेश करने से पहले सदस्यों को उसकी प्रति सर्कुलेट करना अनिवार्य होता है. भारद्वाज ने यह भी कहा कि मंत्री ने लोकसभा अध्यक्ष और सभापति से अनुरोध किया था कि आरटीआई संशोधन विधेयक 2019 को विभाग संबंधी संसदीय स्थाई समिति को नहीं भेजा जाए.