नई दिल्ली. तेल की बढ़ती कीमतों को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सऊदी अरब जैसे तेल प्रोड्यूस करने वाले देशों को एक तरह से चेतावनी देते हुए कहा कि सोने के अंडे देने वाले हंस की हत्या नहीं की जाती. उनका ये संदेश तेल की बढ़ती कीमत और रुपये के लगातार कमजोर होने से देश के आर्थिक स्थित पर पड़ रहे असर के संदर्भ में था. Also Read - सऊदी अरब ने फिर से खोलीं 90 हजार मस्जिदें, मक्का अब भी बंद

घरेलू और ग्लोबल ऑयल इंडस्ट्री के प्रमुखों से सलाना मीटिंग के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हंस और सोने के अंडे के उदाहण का प्रयोग किया. इसके साथ ही उन्होंने खरीददार और बेचने वालों दोनों को ध्यान में रखते हुए दाम के संतुलन की मांग की. सूत्रों के अनुसार, इस बैठक में सऊदी अरब के ऊर्जा मंत्री खालिद ए अल-फलीह भी मौजूद रहे. Also Read - छत पर अलग-अलग पोज में ईरानी कपल ने किया kiss, तस्वीर वायरल होने पर पुलिस ने किया गिरफ्तार

83 फीसदी आयात
बता दें कि भारत अपने तेल की पूर्ति को पूरा करने के लिए 83 फीसदी आयात पर निर्भर रहता है. इस साल भारत ने 90 बिलियन डॉलर कीमत का तेल आयात किया है और ज्यादातर पेमेंट अमेरिकी डॉलर में किया गया है. तेल कंपनी जो बाजार से कच्चे तेल का आयात करती हैं उसके लिए कीमत डॉलर और यूरो में चुकाती हैं. ऐसे में जब रुपये में लगातार गिरावट हो रही है तो उन्हें डॉलर खरीदने में ज्यादा पैसे चुकाने पड़ते हैं. इसका असर इसलिए भी ज्यादा पड़ने लगा है क्योंकि रुपया इस साल 14.5 फीसदी गिर गया है. Also Read - live Eid in Saudi Arabia 2020: सऊदी अरब में नहीं हुआ आज चांद का दीदार, अब इस दिन होगी ईद-उल-फित्र

रुपये में पेमेंट का सुझाव
दुनिया के सबसे बड़े ऑयल प्रोड्यूसर OPEC को भारत ने सुझाव दिया है कि वह भारत को अनुमति दे कि वह तेल के दामों का पेमेंट यूरो और डॉलर की जगह रुपये में करे. ओपेक भारत की जरूरत का 60 फीसदी तेल सप्लाई करता है. ऐसे में यदि यह शर्त मंजूर हो जाती है तो रुपये से पेमेंट से भारत की स्थिति बेहतर हो सकती है.

क्या है ईरान मॉडल
बता दें कि भारत का तीसरा सबसे बड़ा ऑयल सप्लायर देश ईरान है. अमेरिकी पाबंदी लगने के बाद भारत ने उसे रुपये में पेमेंट में ही पेमेंट किया था. इसके पीछे का कारण था कि अमेरिका ने तेहरान को अनुमति दे रखी थी. ऐसे में इन रुपये से ईरान भारत से दवाइयां और भोजन खरीदता रहा. इस तरह से दोनों देश बिजनेस में डॉलर का प्रयोग नहीं करते रहे. ईरान का तेल ऐसे में भारत के लिए ज्यादा फायदेमंद रहा हैं क्योंकि वह 60 दिन के क्रेडिट पर सप्लाई करता रहा है.