नई दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रूस के राष्ट्रपति ब्लादिमिर पुतिन से अनौपचारिक मुलाकात करने सोमवार को सोची पहुंचे. रूस हमेशा से भारत का मजबूत और परखा हुआ साझेदार मित्र देश रहा है. रणनीतिक, मिलिट्री, इकॉनमिक और डिप्लोमेटिक मुद्दे पर दोनों देशों का एक मजबूत इतिहास रहा है.

द्विपक्षीय संबंध
अक्टूबर 2000 में तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और ब्लादिमिर पुतिन ने ”भारत-रूस स्ट्रेटजिक पार्टनरशिप” पर एक समझौते पर सिग्नेचर किया था. सोवियत यूनियन के पतन के बाद यह पहला मौका था जब दोनों देशों ने बेहतर संबंध के लिए पहली बार राजनैतिक पहल करी थी.

इस्लामाबाद से मास्को की बढ़ती नजदीकी
नई दिल्ली की अमेरिका से बढ़ती दोस्ती के बीच रूस ने पाकिस्तान से अपने संबंध बेहतर करने शुरू कर दिए. साल 2016 में दोनों देशों ने पहली बार संयुक्त सैन्य अभ्यास किया. बता दें कि इस दौरान ही उड़ी हमले के कारण भारत इस अभ्यास को रोकने की लगातार अपील करता रहा.वहीं, साल 2015 में लाहौर से कराची तक गैस पाइप लाइन के लिए रूसे और पाकिस्तान ने एक इंटर गवर्नमेंट एग्रीमेंट साइन किया. चीन पहले से रूस का महत्वपूर्ण साझेदार है.

सैन्य साझेदारी
पिछले पांच साल में देश में निर्यात हथियारों में 62 फीसदी हार्डवेयर रूस के ही थे. वहीं, साल 2008-2012 के बीच यह 79 फीसदी था. भारत को विरासत में मिले कुछ हथियार भी सोवियत और रूस के ही हैं, जिन्हें चालू रखने के लिए दोनों देशों में साझेदारी की जरूरत पड़ेगी.

आर्थिक साझेदारी
साल 2014 में भारत और रूस में हुए एक समझौते के मुताबिक, साल 2025 तक द्विपक्षीय व्यापार का लक्ष्य 30 बिलियन डॉलर का रखा है. रसियन फेडलर कस्टम्स सर्विस डेटा के मुताबिक, साल 2016 में द्विपक्षीय व्यापार 7.71 बिलियन अमेरिकी डॉलर रहा है.