
Kajal Kumari
पत्रकारिता में 12 साल से ज्यादा का अनुभव. साल 2009 में पीटीएन न्यूज चैनल से कैरियर की शुरुआत. 2011 से 2014 तक DDNews में कॉपी एडिटर, साल 2016 से 2020 ... और पढ़ें
Russia-Ukraine Crisis: रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध जैसे हालात बने हुए हैं. इसे लेकर पूरी दुनिया में हलचल मची है और विश्वयुद्ध जैसे हालात बने हुए हैं. पश्चिमी यूरोप के देश फ्रांस, जर्मनी और अमेरिका खुलकर रूस के खिलाफ यूक्रेन के समर्थन में खड़े नजर आ रहे हैं, तो वहीं कई देश इन दोनों देशों के बीच युद्ध के हालात पर काबू पाने के लिए बातचीत के जरिए इसका समाधान चाहते हैं. संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की इमरजेंसी बैठक में भारत ने दोनों देशों के बीच तटस्थ रवैया अपनाते हुए इस विवाद का समाधान शांतिपूर्ण तरीके से बातचीत के जरिये निकाले जाने की बात कही है.
दोनों देशों के बीच उपजे हालात को लेकर भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने फ्रांस के एक समाचार पत्र ले फिगारो के साथ दिए गए साक्षात्कार में कहा है कि यूक्रेन और रूस के बीच जारी गतिरोध की जड़ें सोवियत के बाद की सियासत में हैं. उन्होंने कहा कि यूक्रेन के साथ रूस के बीच बने इन हालात को लेकर मौजूदा की जड़ें नाटो (NATO) के विस्तार और यूरोपीय देशों के साथ रूस के बदलते संबंधों में भी हैं. ये पिछले 30 साल में बनीं जटिल परिस्थितियों का परिणाम है कि आज युद्ध के हालात बन गए हैं. उन्होंने कहा कि शांति बनी रहनी चाहिए, युद्ध किसी समस्या का समाधान नहीं है और फ्रांस की तरह कई सक्रिय देश इस मसले के कूटनीतिक समाधान की मांग कर रहे हैं.
फ्रेंच इंस्टीट्यूट ऑफ इंटरनेशनल रिलेशंस में भारतीय विदेश मंत्री ने फ्रांस के साथ द्विपक्षीय रिश्तों को लेकर भी अपनी राय रखी. उन्होंने कहा कि भारत समुद्र से लेकर अंतरिक्ष तक सुरक्षा चुनौतियों का मुकाबला करने में फ्रांस को विश्वसनीय भागीदार के रूप में देखता है. उन्होंने कहा कि, “मैं विश्वास के साथ कह सकता हूं कि 75 साल पहले एक स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में हमारी यात्रा शुरू होने के बाद से यह (भारत-फ्रांस संबंध) अब तक का सबसे मजबूत संबंध है.”
एस जयशंकर ने ताइवान और यूक्रेन की तुलना से संबंधित एक सवाल के जवाब में कहा कि इन दोनों देशों के हालात अलग हैं, दोनों देशों की उत्पत्ति की पृष्ठभूमि भी अलग है. उन्होंने चीन और भारते के बीच के संबंध को लेकर कहा कि पूर्वी लद्दाख की सीमा पर 13 दौर की सैन्य वार्ता के बाद कई जगह समाधान निकला. कुछ जगह अब भी टकराव है जिसका समाधान किया जाना है. विदेश मंत्री ने साफ किया कि हम वास्तविक नियंत्रण रेखा में एकतरफा बदलाव के किसी भी प्रयास को स्वीकार नहीं करेंगे.
पेरिस में विदेश मंत्री डॉ एस जयशंकर ने कहा है कि क्वाड क्षेत्रीय और वैश्विक चुनौतियों में मदद करेगा. क्वाड के पीछे सोच यह थी कि हम चारों एक दूसरे के साथ काम करने में सहज हैं और हमारा मजबूत द्विपक्षीय संबंध हैं. आईएफआरआई, क्वाड की उत्पत्ति 2004 में हुई थी. हमारे पास तब सुनामी थी और सूनामी के जवाब में क्वाड देशों ने समन्वय किया था और उस समन्वय ने एक बड़ा अंतर बनाया और हमें एक-दूसरे का समर्थन करने और अधिक प्रभावी तरीके से राहत सहायता प्राप्त करने में सक्षम बनाया.
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