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काठमांडू, 25 नवंबर | भारत ने मंगलवार को दक्षिण एशियाई क्षेत्र के लिए आतंकवाद को सबसे बड़ी चुनौती बताया और इसके प्रति सामूहिक प्रतिक्रिया का आह्वान किया। साथ ही उसने दक्षिण एशिया में क्षेत्रीय शांति, समृद्धि तथा विकास की दिशा में अपनी ईमानदार तथा स्थायी प्रतिबद्धता को दोहराया। दक्षेस मंत्रिपरिषद की यहां बैठक में भारत की विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने अपने बयान में कहा कि नरेंद्र मोदी की सरकार ‘सबका साथ, सबका विकास’ के दृष्टिकोण के प्रति बचनबद्ध है, जो दक्षेस का भी दृष्टिकोण है। Also Read - PAK में 2 करोड़ मास्क की तस्करी में फंसा है सार्क देशों की वीडियो कॉन्फ्रेंस में कश्मीर मुद्दा उठाने वाला इमरान का खास

सुषमा ने विकास के लिए सरकार के तीन ‘सी’ संस्कृति, वाणिज्य तथा संपर्क पर जोर दिया।  उन्होंने अफगानिस्तान के पकटिका प्रांत में रविवार को बॉलीवॉल मैच के दौरान हुए उस आत्मघाती हमले की निंदा की, जिसमें 45 लोगों की मौत हो गई थी, जबकि 50 लोग घायल हो गए थे।  उन्होंने कहा, “बॉलीवॉल मैच देख रहे लोगों पर कायराना हमला एक बार फिर दर्शाता है कि आज की तारीख में आतंकवाद इस क्षेत्र के लिए सबसे बड़ी चुनौती है और इसके लिए सामूहिक प्रतिक्रिया की जरूरत है।” Also Read - SAARC देशों के साथ वीडियो कांफ्रेंस में पाकिस्तान ने उठाया कश्मीर मुद्दा, कहा- सभी तरह की पाबंदी को हटा लेना चाहिए

बुधवार को यहां दो दिवसीय दक्षेस शिखर सम्मेलन शुरू हो रहा है, जिसमें मोदी सहित दक्षेस राष्ट्रों के सभी प्रमुख हिस्सा लेंगे। सुषमा ने कहा कि दक्षिण एशिया मुक्त व्यापार क्षेत्र (साफ्टा) से दक्षेस राष्ट्रों के बीच व्यापार को गति मिली है, लेकिन अभी भी यह क्षमता से कम है। भारत ने अंतर क्षेत्रीय व्यापार को बढ़ावा देने के लिए दक्षेस के कम विकसित राष्ट्रों के माल को ड्यूटी से मुक्त करना सहित कई कदम उठाए हैं।

संपर्क पर बात करते हुए सुषमा ने कहा कि समुद्री तथा जलमार्ग, जमीन व हवाई संपर्क अभी भी बेहद कम तथा अविकसित है। हमें बुनियादी ढांचे के निर्माण पर ध्यान देना चाहिए।