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काठमांडू, 26 नवंबर | दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन (दक्षेस) के सदस्य देशों के नेताओं के अनुसार, दक्षिण एशिया में स्थायी विकास के लिए अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी में क्षेत्रीय सहयोग बढ़ाया जाना चाहिए। 18वें दक्षेस शिखर सम्मेलन के उद्घाटन के अवसर पर अपने संबोधन में भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि उनका देश 2016 तक क्षेत्र के लिए उपग्रह विकसित करने के लिए तैयार है। Also Read - चीन ने कई जगहों पर नेपाल की जमीन पर अवैध कब्जा किया, भारतीय खुफिया एजेंसियां सतर्क

उन्होंने कहा, “भारत आर्थिक विकास और शासन में अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी की अपनी क्षमता को मजबूती देने के लिए अपने दक्षिण एशियाई साझेदारों के लिए सम्मेलन आयोजित करेगा।” कुछ महीने पहले एक व्यावसायिक उपग्रह प्रक्षेपण के दौरान मोदी ने इसरो में मौजूद वैज्ञानिकों से दक्षेस उपग्रह विकसित करने और पूरे क्षेत्र के हितों के लिए भारत के उपग्रह आधारित नौवहन प्रणाली को विकसित करने की अपील की थी। Also Read - RAW प्रमुख से मिले नेपाल के प्रधामनंत्री केपी शर्मा ओली, शुरू हुआ 'विवाद'

समाचार एजेंसी सिन्हुआ के अनुसार, इसी तरह श्रीलंका के राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे ने दक्षेस देशों के बीच संबंध बढ़ाने के लिए ‘अंतरिक्ष कूटनीति’ पर ध्यान देने की बात कही। उन्होंने कहा, “अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी का दूरसंचार और आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में इस्तेमाल, दक्षेस के सामाजिक-आर्थिक विकास के लिए बेहद लाभदायी होगा।” श्रीलंका के राष्ट्रपति ने अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी में भारत की प्रगति की प्रशंसा की और दक्षेस के लिए उपग्रह विकास के मोदी के प्रस्ताव का स्वागत किया।

फिलहाल दक्षेस के सिर्फ दो देशों-भारत और पाकिस्तान- ने अंतरिक्ष में उपग्रह भेजे हैं, लेकिन अन्य देश इसका अनुसरण करने की कोशिश कर रहे हैं।