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काठमांडू, 26 नवंबर | दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन (दक्षेस) का 18वां शिखर सम्मेलन बुधवार को यहां शुरू हो गया। सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि दक्षिण एशिया के भविष्य को लेकर भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कौन सी पहल का प्रस्ताव लाने वाले हैं। Also Read - भारतीय सेना अध्यक्ष से बोले नेपाली प्रधानमंत्री, भारत और नेपाल का रिश्ता है सदियों पुराना

सम्मेलन का आयोजन नेपाल कर रहा है। आयोजक देश के अतिरिक्त दक्षेस के अन्य सात देशों की सरकारों के प्रमुख भी इस समय सम्मेलन में भाग लेने के लिए काठमांडू में हैं। दक्षेस के अध्यक्ष मालदीव के राष्ट्रपति अब्दुल्ला यामीन अब्दुल ने सम्मेलन का उद्घाटन किया और इसके बाद इसकी अध्यक्षता की जिम्मेदारी नेपाल के प्रधानमंत्री सुशील कोइराला को सौंप दी। Also Read - नेपाल की राष्‍ट्रपति ने जनरल एमएम नरवणे को 'नेपाली सेना के जनरल' की रैंक से किया सम्‍मानित किया

नेपाल तीसरी बार इस सम्मेलन का आयोजन कर रहा है। इससे पहले वर्ष 1987 और वर्ष 2002 में भी वह दक्षेस सम्मेलन का आयोजन कर चुका है। शिखर सम्मेलन से पहले सभी सदस्य देशों के बीच विदेश मंत्री, विदेश सचिव और संयुक्त सचिव स्तर की वार्ता भी हुई। दक्षेस देशों ने कृषि उत्पादकता और खाद्य एवं पोषण सुरक्षा को बेहतर बनाने, आर्थिक, व्यापार, स्वास्थ्य, वित्त, निवेश, ऊर्जा, संपर्क, शिक्षा तथा कृषि के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने का निर्णय लिया।

सम्मेलन में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ, श्रीलंका के राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे, अफगानिस्तान के राष्ट्रपति मोहम्मद अशरफ गनी, बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना, मालदीव के राष्ट्रपति अब्दुल्ला यामीन अब्दुल तथा भूटान के प्रधानमंत्री लियोचेन शेरिंग टॉबगे हिस्सा ले रहे हैं।