कोच्चि. केरल उच्च न्यायालय ने गुरुवार को एक जनहित याचिका को खारिज कर दिया. इसमें मांग की गई थी कि सबरीमला में भगवान अयप्पा के मंदिर में तब तक माहवारी की उम्र वाली महिलाओं के प्रवेश पर रोक लगी रहनी चाहिए जब तक उनके लिए अतिरिक्त सुविधाएं शुरू नहीं हो जातीं. अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ता उच्चतम न्यायालय जा सकते हैं. Also Read - Farm Laws पर बनाई गई कमेटी से अलग हुए भूपिंदर सिंह मान, सुप्रीम कोर्ट ने किया था गठन

मुख्य न्यायाधीश रिषीकेश रॉय और न्यायमूर्ति ए के जयशंकरन नांबियार की पीठ ने याचिका को खारिज करते हुए कहा कि सभी संवैधानिक संस्थाएं शीर्ष अदालत के निर्देशों का पालन करने के लिए बाध्य हैं. Also Read - Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट ने बिल्डरों पर कसा शिकंजा, अगर समझौते के मुताबिक नहीं दिया फ्लैट तो देना होगा ब्याज

उच्चतम न्यायालय के तत्कालीन प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने 28 सितंबर को सबरीमला मंदिर में 10 से 50 साल की उम्र की महिलाओं के प्रवेश पर सदियों से लगी रोक हटा दी थी. उच्च न्यायालय ने कहा कि याचिकाकर्ता पी डी जोसफ इस मामले में उच्चतम न्यायालय में जा सकते हैं. Also Read - Kisan Andolan: दिल्ली की अलग-अलग सीमाओं पर प्रदर्शन कर रहे किसानों ने लोहड़ी पर नए कृषि कानूनों की प्रतियां जलाईं