नई दिल्ली: सबरीमला मंदिर में 10 साल से 50 साल तक की महिलाओं को एंट्री देने के सुप्रीम कोर्ट फैसले का केरल में जमकर विरोध हो रहा है. शीर्ष कोर्ट के फैसले के बाद आज मंदिर का द्वार खुल रहा है. मंदिर में प्रवेश को लेकर महिलाएं ही महिलाओं का विरोध कर रही हैं. मंदिर जाने के मुख्य रास्ते निलक्कल में बुधवार की सुबह माहौल और तनावपूर्ण हो गया. सबरीमला पहाड़ी से करीब 20 किलोमीटर दूर निलक्कल में बड़ी संख्या में तैनात पुलिसकर्मियों ने महिलाओं के प्रवेश के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे समूह ‘सबरीमला आचार संरक्षण समिति’ के तंबू आदि को हटा दिया. Also Read - मध्‍य प्रदेश में कांग्रेस को एक और झटका, पार्टी के विधायक ने इस्‍तीफा देकर बीजेपी ज्‍वाइन की

इस बीच बीजेपी सांसद उदित राज ने बड़ा बयान दिया है. उदित राज ने कहा कि मैंने समानता के लिए लड़ाई देखी है, गुलामी और असमानता के लिए नहीं. एक ओर, देश में पुरुषों द्वारा अत्याचारों के खिलाफ लड़ाई चल रही है वहीं दूसरी तरफ, महिलाएं अपनी ही स्वतंत्रता और अधिकारों के खिलाफ लड़ रही हैं. यह दुनिया में पहली बार हो रहा है. महिलाएं कह रही हैं मुझे गुलाम बनाओ, मुझसे असमान रूप से व्यवहार करो, हम पुरुषों से कम हैं. महिलाएं ही महिलाओं को रोक रही हैं. मुझे नहीं पता कि इस देश में हो क्या रहा है. बीजेपी सांसद उदित राज ने कहा कि यह उनकी निजी राय है इसे राजनीति से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए. Also Read - राजस्थान में गहलोत सरकार पर संकट, भाजपा ने अपनाई 'वेट एंड वाच' की नीति

वहीं बीजेपी नेता सुब्रमण्यम स्वामी का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट ने फैसला किया है, लेकिन अब आप कह रहे हैं कि यह हमारी परंपरा है. ट्रिपल तालाक भी इस तरह की परंपरा थी, जब इसे खत्म कर दिया गया तो सब लोग प्रशंसा कर रहे थे. वही हिंदू अब सड़कों पर उतर आए हैं. उन्होंने कहा कि यह लड़ाई हिंदू पुनर्जागरण और रुढ़िवाद के बीच की है.पुनर्जागरण का कहना है कि सभी हिंदू बराबर हैं और जाति व्यवस्था को समाप्त किया जाना चाहिए, क्योंकि आज केवल ब्राह्मण ही बौद्धिक नहीं है, इसलिए वे सिनेमा और व्यापार में भी हैं. यह कहां लिखा गया है कि जाति जन्म से है? शास्त्रों में संशोधन किया जा सकता है. Also Read - जेपी नड्डा बोले- केरल में बढ़ रहा भाजपा का ग्राफ, आने वाले समय में खिलेगा कमल

भले ही बीजेपी के नेता सबरीमला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश को लेकर हो रहे विरोध को गलत मान रहे हो लेकिन केरल में बीजेपी सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ सड़कों पर है. सबरीमला मंदिर में सभी उम्रवर्ग की महिलाओं के प्रवेश की अनुमति संबंधी सुप्रीम कोर्ट के आदेश को लागू करने का विरोध करते हुए हजारों बीजेपी कार्यकर्ताओं ने सोमवार को यहां केरल राज्य सचिवालय की ओर मार्च किया. महिलाओं और बच्चों समेत बड़ी संख्या में भाजपा कार्यकर्ताओं ने भगवान अयप्पा का मंत्रोच्चार करते हुए राज्य सचिवालय की ओर मार्च किया. उनके हाथों में भगवान अयप्पा की माला वाली तस्वीरें थीं.

पिछले हफ्ते पंडलाम से शुरू हुई विशाल पदयात्रा वाम सरकार द्वारा भगवान अयप्पा की संवेदनाओं पर विचार किये बगैर शीर्ष अदालत के फैसले को लागू करने के फैसले के खिलाफ थी. नेता से सासंद बने सुरेश गोपी, भारतीय धर्मा जनसेना के प्रमुख तुषार वेल्लापल्ली समेत राजग के कई वरिष्ठ नेता इस मार्च में आगे आगे चल रहे थे और उसकी अगुवाई प्रदेश भाजपा अध्यक्ष पी एस श्रीधरन पिल्लई कर रहे थे. पिल्लई ने कहा, ‘हम केरल में हर ग्रामीण से मिलेंगे और सबरीमला मंदिर, उसकी सदियों पुरानी परंपराओं और भगवान अयप्पा के अनुयायियों की संवेदना की रक्षा करने के लिए व्यापक जनांदोलन की योजना तैयार करेंगे.