नई दिल्ली: सबरीमाला में भगवान अयप्पा के मंदिर में दो महिलाओं के प्रवेश के विरोध में हिंदू संगठनों द्वारा आहूत सुबह से शाम तक 12 घंटे की हड़ताल गुरुवार सुबह शुरू हो गई. शुरुआती रिपोर्टों के अनुसार, राज्य की राजधानी में ऑटो रिक्शे और दोपहिया वाहन रेलवे स्टेशन और अन्य स्थानों पर पर आते जाते दिखाई दिए, लेकिन कोझिकोड में सुबह प्रदर्शनकारियों ने कई जगह वाहनों को रोका और टायर जलाए. यह हड़ताल विभिन्न हिंदुत्ववादी समूहों के एक संयुक्त संगठन ‘सबरीमाला कर्म समिति’ द्वारा बुलाई गई है, जो सुप्रीम कोर्ट के 28 सितंबर के फैसले के खिलाफ विरोध प्रदर्शनों की अगुवाई कर रहा है. वहीं गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की जल्द सुनवाई से  इनकार कर दिया. कोर्ट ने कहा कि इस मामले की सुनवाई के लिए 22 जनवरी की तारीख तय है. वकील पीवी दिनेश ने इस मामले में याचिका दायर की थी जिसे कोर्ट ने खारिज कर दिया.

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भाजपा बंद का समर्थन कर रही है जबकि कांग्रेस-नीत यूडीएफ गुरुवार को “काला दिवस” मना रहा है. गौरतलब है कि दो महिलाओं कनकदुर्गा (44 वर्ष) और बिंदू (42 वर्ष) ने हिन्दूवादी संगठनों की तमाम धमकियों की परवाह न करते हुए बुधवार तड़के भगवान अयप्पा के सबरीमाला मंदिर में प्रवेश कर सदियों पुरानी परंपरा तोड़ दी. मंगलवार को महिलाओं के ‘वीमेन वॉल’ अभियान के तहत देश के उत्तरी सिरे कासरगोड से दक्षिणी छोर तक करीब 620 किलोमीटर लंबी एक श्रृंखला (चनन) बनाने के एक दिन बाद महिलाएं यहां दर्शन के लिए पहुंची.

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सबरीमाला के अयप्पा मंदिर में बुधवार सुबह दो महिलाओं के प्रवेश करने के बाद कांग्रेस और भाजपा ने केरल की माकपा नेतृत्व वाली एलडीएफ सरकार और मुख्यमंत्री पिनराई विजयन पर जमकर हमला बोला था. विपक्ष के नेता रमेश चेन्निथला ने कहा कि मंदिर में महिलाओं के प्रवेश ने श्रद्धालुओं की भावनाओं को आहत किया और यह ‘प्रतिबंधित’ आयुवर्ग की महिलाओं को मंदिर में प्रवेश कराने के मुख्यमंत्री के कड़े रवैये को दर्शाता है.

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कांग्रेस नेता चेन्निथला ने पत्रकारों से कहा, ‘वीमेन वॉल’ अभियान के बाद उन्हें कौन मंदिर लेकर गया? 24 दिसम्बर को पहली बार मंदिर में प्रवेश करने के असफल प्रयास के बाद से वे कई दिनों से फरार थीं. यह स्पष्ट है कि वे पुलिस संरक्षण में थी. पुलिस ने मुख्यमंत्री के निर्देशानुसार काम किया. यह मुख्यमंत्री के अड़ियल रवैया का नतीजा है. उन्होंने यह भी कहा कि शुद्धिकरण के लिए मंदिर का बंद किया जाना ‘शत प्रतिशत’ सही है. ‘यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट’ के नेता ने कहा कि वह राज्यभर में इसके खिलाफ प्रदर्शन करेंगे.

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भाजपा के राज्य प्रमुख पी एस श्रीधरन पिल्लई ने कहा था कि केरल सरकार को भगवान अयप्पा के ‘क्रोध’ का सामना करना पड़ेगा. उन्होंने यह भी कहा कि राज्य सरकार ने श्रद्धालुओं की भावनाओं को ठगा है. वहीं भाजपा नेता एम टी रमेश ने कहा कि पार्टी अगले दो दिनों तक श्रद्धालुओं द्वारा राज्य में किए जाने वाले ‘नाम जपम’ प्रदर्शन का समर्थन करेगी.

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राज्य सरकार के सबरीमाला में सभी उम्र की महिलाओं को अनुमति देने के शीर्ष अदालत के आदेश को लागू करने के फैसले के खिलाफ “नाम जपम” आंदोलन की अगुवाई करने वाली ‘सबरीमाला कर्म समिति’ ने मुख्यमंत्री के इस्तीफे की मांग की है. गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल सितंबर में ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए 10 वर्ष से 50 वर्ष की उम्र की महिलाओं को मंदिर में प्रवेश की अनुमति दी थी. राज्य के डीजीपी लोकनाथ बेहरा ने हड़ताल के दौरान हिंसा करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी है.

(इनपुट-भाषा)