नई दिल्लीः चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पीठ ने गुरुवार को सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश के मामले को बड़ी बेंच को सौंप दिया. इस मामले पर लंबे समय तक चली सुनवाई के बाद शीर्ष अदालत ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया. गुरुवार को शीर्ष अदालत ने कहा कि यह एक बड़ा मामला है इसे और बड़ी बेंच को सौंपने की जरूरत है.

चीफ जस्टिस की अध्यक्षता वाली 5 सदस्यीय पीठ ने कहा कि इस मामले में महिलाओं की प्राकृतिक अवस्था को दरकिनार नहीं किया जा सकता. उन्होंने यह भी कहा कि महिलाओं के प्रवेश का मामला मस्जिदों से जुड़ा है. अब इस बहु चर्चित मुद्दे को सात जजों की बेंच सुनवाई करेगी. चीफ जस्टिस ने कहा कि मस्जिदों के साथ पारसी मंदिरों में भी महिलाओं के प्रवेश पर विवाद है.

आपको बता दें कि सबरीमाला मंदिर में 10 साल से लेकर 50 साल की महिलाओं का प्रवेश वर्जित है. सुुप्रीम कोर्ट ने एक सुनवाई के दौरान मंदिर में प्रवेश की इजाजत दी थी लेकिन लोगों ने इसके बाद भी महिलाओं को प्रवेश पर पाबंदी लगी रही और इस फैसले के खिलाफ पुनर्याचिका दायर की गई. इस याचिका पर सुनवाई करते हुए आज सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह धर्म से जुड़ा एक बड़ा मामला है इसलिए इसे बड़ी बेंच में भेजना जरूरी है.

इस पूरे मामले को लेकर कई बार देश में कई आंदोलन भी हुए और मंदिर में महिलाओं के प्रवेश पर रोक उनके मूलभूत अधिकारों का हनन भी बताया गया. कुछ विशेषज्ञ महिलाओं के प्रवेश के पीछे तर्क देते हैं कि अयप्पा एक ब्रह्मचारी पुरुष थे इसलिए उनके मंदिर में महिलाओं का प्रवेश पूरी तरह से जरूरी है.