जयपुरः राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट के बीच सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है. राज्य में इन दोनों के नेतृत्व में सरकार के गठन को 10 दिन हो चुके हैं लेकिन अब तक यह सरकार कामकाज के मोड में नहीं आई है. अभी तक मंत्रियों के विभागों का बंटवारा नहीं हुआ है. इन दोनों नेताओं के बीच अपने-अपने गुट के मंत्री को अहम विभाग देने को लेकर तकरार जारी है. तभी तो दोनों ने बुधवार शाम में दिल्ली दरबार का रुख किया. दिल्ली में ये दोनों कांग्रेस के केंद्रीय नेतृत्व से बातकर विभागों के बंटवारे को अंतिम रूप देंगे. Also Read - World Disability Day: दिव्यांगों ने खुद के बनाये मास्क बांटकर कोरोना के प्रति लोगों को किया जागरूक

Also Read - Lockdown in Rajasthan: अब राजस्थान में 31 दिसंबर तक लगा लॉकडाउन और नाइट कर्फ्यू, नहीं खुलेंगे स्कूल, देखें नई गाइडलाइन

अशोक गहलोत और सचिन पायलट ने 17 दिसंबर को मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी. इसके पूरे एक सप्ताह बाद 24 दिसंबर को कैबिनेट में 23 मंत्रियों को शामिल किया गया था. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक गहलोत ने कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अविनाश पांडे और केसी वेणुगोपाल से मुलाकात की. Also Read - राजस्थान की BJP विधायक किरण माहेश्वरी का कोरोना संक्रमण से निधन

कर्नाटक में सियासी संकट की आशंका, भाजपा का दावा- कांग्रेस-JD(S) के 15 विधायक संपर्क में

राज्य में कांग्रेस नेतृत्व के बीच जारी तकरार ने विपक्षी भाजपा को हमलावर होने का मौका दे दिया है. भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष मदनलाल सैनी ने आरोप लगाया कि राज्य में इस समय दो समानांतर सरकार है जो एक-दूसरे से लड़ रही है. वहीं पूर्व मंत्री अरुण चतुर्वेदी ने कहा कि कांग्रेस का केंद्रीय नेतृत्व राजस्थान की छोटी-छोटी चीजों को सुलझाने में लगा है, क्योंकि इस पार्टी का काम करने का तरीका ही यही है. उन्होंने कहा कि मंत्रियों के निजी सहायकों के बारे में भी फैसला दिल्ली में होगी.