श्रीनगर: जम्मू-कश्मीर के मुख्य धारा के राजनीतिक दलों ने बृहस्पतिवार को एक बैठक की और पूर्ववर्ती राज्य के विशेष दर्जे की बहाली के लिए एक गठबंधन बनाया. यह गठबंधन इस मुद्दे पर सभी संबंधित पक्षों से वार्ता भी शुरू करेगा. गठबंधन को लेकर जम्मू-कश्मीर (Jammu Kashmir) के नेता सज्जाद लोन ने एनडीटीवी से बात करते हुए कहा कि अनुच्छेद 370 (Article 370) हटाने के केंद्र सरकार के निर्णय ने क्षेत्र की सभी पार्टियों को एक मंच पर आने का मौका दिया है. Also Read - एकनाथ खडसे ने भाजपा छोड़ कहा- देवेंद्र फडणवीस ने मेरा जीवन बर्बाद किया, NCP में शामिल होऊंगा

नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला के आवास पर बैठक हुई और इसमें पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती, पीपल्स कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष सज्जाद लोन, पीपल्स मूवमेंट के नेता जावेद मीर और माकपा नेता मोहम्मद युसूफ तारिगामी ने भी हिस्सा लिया. Also Read - मार्केट इंटरवेंशन स्कीम के विस्तार को मंजूरी, मोदी सरकार के फैसले से जम्मू-कश्मीर के सेब उत्पादकों की बढ़ेगी कमाई

इस साल जुलाई में नजरबंदी से रिहा किए गए सज्जाद लोन ने कहा, “केंद्र की सरकारें आएंगी और जाएंगी, हम यहां के बाशिंदे हैं, पर्यटक नहीं. हम यहां टिक कर रहेंगे.” बता दें कि लोन बीजेपी और पीडीपी की गठबंधन सरकार में मंत्री थे. उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर की संवैधानिक स्वायत्तता को केंद्र द्वारा छीना जाना अदूरदर्शिता पूर्ण और नफरत से भरा कदम था. Also Read - कश्मीर में भारत 22 अक्टूबर को मनाएगा 'काला दिवस', 1947 में पाकिस्तान ने घाटी में कराई थी हिंसा

बता दें कि इससे पहले गुरुवार को करीब दो घंटे चली बैठक के बाद अब्दुल्ला ने संवाददाताओं से कहा कि नेताओं ने गठबंधन बनाने का निर्णय किया, जिसका नाम ‘पीपल्स अलायंस फॉर गुपकार डिक्लेरेशन’ रखा गया है. इन नेताओं ने अनुच्छेद 370 को हटाने के खिलाफ आगे लड़ाई लड़ने का संकेत दिया था. लोन के मुताबिक, यह साझा कवायद होगी, जिसका अहम मकसद उसे वापस पाना है, जिसे हमसे छीना गया है. हम देश के अन्य हिस्सों के नागरिकों की तरह संविधान के दायरे में शांतिपूर्वक संघर्ष करेंगे.

नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष ने कहा कि गठबंधन जम्मू-कश्मीर के संबंध में संवैधानिक स्थिति बहाल करने के लिए प्रयास करेगा, जैसा पिछले वर्ष पांच अगस्त से पहले था. उन्होंने कहा, ‘‘जम्मू-कश्मीर और लद्दाख से जो छीन लिया गया, उसकी बहाली के लिए हम संघर्ष करेंगे. हमारी संवैधानिक लड़ाई है… हम (जम्मू-कश्मीर के संबंध में) संविधान की बहाली के लिए प्रयास करेंगे, जैसा कि पांच अगस्त 2019 से पहले था.’’

भाजपा को छोड़कर कश्मीर के सभी बड़े राजनीतिक दलों की पिछले वर्ष चार अगस्त को फारूक अब्दुल्ला के आवास पर बैठक हुई थी. यह बैठक पूर्ववर्ती राज्य में अनिश्चितता और तनाव के बीच हुई थी, क्योंकि केंद्र ने अतिरिक्त अर्द्धसैनिक बलों को वहां तैनात किया था और अमरनाथ के श्रद्धालुओं सहित सभी पर्यटकों को जल्द से जल्द घाटी छोड़ने के लिए कहा गया था. स्थिति को लेकर चिंता जाहिर करते हुए राजनीतिक दलों ने संयुक्त बयान जारी किया था जिसे ‘गुपकार घोषणा’ के नाम से जाना जाता है.

केंद्र सरकार ने पिछले साल पांच अगस्त को अनुच्छेद 370 के तहत राज्य को मिले विशेष दर्जे को समाप्त कर दिया था और राज्य को दो केंद्र शासित क्षेत्रों — जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में विभाजित कर दिया था.

(इनपुट भाषा)