पुणे. भीमा कोरेगांव हिंसा मामले में आरोपी 85 वर्षीय संभाजी भिड़े की एक तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है. इस तस्वीर के साथ में जो बात लिखी है, वो ये कि खुदपर केस दायर होने के तत्काल बाद अगले ही दिन संभाजी भिड़े स्वयं चलकर कोर्ट पहुंचे थे. गुरुजी के नाम से चर्चित संभाजी भिड़े ने जैसे ही हाथ जोड़े, उनके सम्मान में एसडीएम और पुलिस अधीक्षक हाथ जोड़कर खड़े हो गए. इससे पहले, ऐसी कई तस्वीरें-वीडियो सामने आए थे जिसमें सभाजी भिड़े साइकिल चलाते हुए, लोगों से मिलते हुए दिखाई दे रहे थे. 

पुणे हिंसा: जानिए कौन हैं 85 साल के संभाजी भिड़े जिन्हें 4-5 लाख युवा करते हैं फॉलो

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भीमा-कोरेगांव की घटना में किसी भी तरह की भूमिका से भिड़े का इनकार Also Read - शरद पवार का बड़ा आरोप, बोले- पर्दाफाश होने के डर से केंद्र ने कोरेगांव भीमा मामले की जांच NIA को सौंपी

भीमा-कोरेगांव में हिंसा भड़काने के आरोपी हिन्दुत्व समर्थक नेता संभाजी भिड़े ने इस पूरे प्रकरण में किसी भी भूमिका से इनकार किया है. पुणे जिले में एक जनवरी को भीमा-कोरेगांव युद्ध स्मारक के निकट हुई हिंसा पर दलित संगठनों की ओर से तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली थी. इसको लेकर मुंबई और महाराष्ट्र के अन्य हिस्सों में बंद देखने को मिला था.

पश्चिमी महाराष्ट्र के सांगली में संवाददाताओं से बातचीत के दौरान भिड़े ने कहा, ‘न्यायिक या सीबीआई जांच का आदेश दीजिए. हिंसा की जांच भगवान यम की अगुवाई वाले किसी तंत्र से करा लीजिए. मैं किसी भी तरह की जांच का सामना करने को तैयार हूं. मेरे खिलाफ लगाये गए सभी आरोप निराधार हैं और जांच के बाद सच सामने आ जाएगा.’ सांगली में उनकी मजबूत पैठ है.

मुंबई में संवाददाताओं से बातचीत में शिव प्रतिष्ठान हिन्दुस्तान के एक पदाधिकारी ने भिड़े का बचाव किया. शिव प्रतिष्ठान हिन्दुस्तान के चेतन बारसकर ने कहा, ‘यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है कि भिड़े गुरुजी का नाम इसमें घसीटा जा रहा है जबकि हिंसा के समय वह पुणे में थे भी नहीं. वह सांगली में एक कार्यक्रम में हिस्सा ले रहे थे. भिड़े गुरुजी हर दिन लोगों से बात करते हैं, भाषण देते हैं. उन्होंने एक बार भी एक जनवरी (कार्यक्रम) का जिक्र नहीं किया था.’ एक अन्य पदाधिकारी बलवंत दलवी ने कहा कि मुंबई में रविवार को होने वाले एक कार्यक्रम को स्थगित कर दिया गया है. इस कार्यक्रम में भिड़े को हिस्सा लेना था. 

85 साल के संभाजी भिड़े की सूर्य नमस्कार करते हुए फोटो

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उन्होंने कहा, ‘पुलिस अधिकारियों ने हमसे मुलाकात की और कहा कि कानून-व्यवस्था से जुड़ी दिक्कत पैदा हो सकती है…किसी भी तरह की घटना ना हो, इसे सुनिश्चित करने के लिए यह कार्यक्रम अब बाद में होगा.’ इस संबंध में एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने ‘पीटीआई’ से कहा कि कानून और व्यवस्था से जुड़ी आशंकाओं के कारण पुलिस ने भिड़े को मुंबई में किलों के इतिहास पर भाषण देने की अनुमति नहीं दी.

कुछ दलित संगठनों ने पुलिस महानिदेशक और मुंबई के पुलिस आयुक्त को पत्र लिखकर भिड़े को भाषण देने की अनुमति नहीं देने और शहर में उनके प्रवेश को प्रतिबंधित करने की मांग की थी. हिंसक झड़प की घटना के एक दिन बाद दो जनवरी को पुणे पुलिस ने भिड़े और अन्य के खिलाफ अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया था. दलित नेता 1818 में भीमा-कोरेगांव युद्ध में पेशवाओं की सेना पर ईस्ट इंडिया कंपनी की सेना की जीत का जश्न मनाते हैं क्योंकि ब्रिटिश सेना में दलित महार सैनिक भी शामिल थे.

कुछ हिन्दुत्ववादी संगठनों ने इस साल इससे जुड़े समारोह का विरोध किया था. संबंधित घटनाक्रम में भीमा-कोरेगांव की हिंसा के संबंध में समस्त हिन्दू अघाड़ी के नेता मिलिंद एकबोटे और भिड़े के खिलाफ दर्ज एक मामले को औरंगाबाद की छावनी पुलिस ने मामले को पुणे जिले के शिकारपुर थाने में स्थानांतरित कर दिया. यहां पहले से दोनों के खिलाफ मामले दर्ज हैं.

पुलिस उपायुक्त विनायक धकने ने बताया कि शिकायत के मुताबिक जयाश्री इंगले ने कहा है कि युद्ध स्मारक पर श्रद्धांजलि देने जाते समय 20-25 लोगों ने उनके वाहन पर पथराव किया. इस वाहन में उनके परिवार के सदस्य भी थे.