नई दिल्ली: आम आदमी पार्टी (आप) के वरिष्ठ नेता व दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सियोदिया ने आरोप लगाया है कि मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के वीडियो से छेड़छाड़ करने के पीछे भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) है. अपने पार्टी कार्यालय में रविवार को आयोजित संवाददाता सम्मेलन में सिसोदिया ने कहा कि तीन नए कृषि कानूनों के कारण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विश्वसनीयता को धक्का लगा है और भाजपा नेताओं ने अब कृषि कानूनों पर अपने विचारों को उचित ठहराने के लिए केजरीवाल का इस्तेमाल कर रहे हैं. Also Read - अरविंद केजरीवाल ने कहा- किसानों के लिए डेथ वारंट हैं कृषि कानून, लाल किले पर बीजेपी ने कराई थी हिंसा

सिसोदिया ने कहा कि विवादास्पद कृषि कानूनों के चलते जहां एक ओर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विश्वसनीयता को धक्का लगा है, वहीं दूसरी ओर भाजपा नेताओं ने कृषि कानूनों पर अपने विचार को उचित ठहराने के लिए केजरीवाल का इस्तेमाल करना शुरू कर दिया है. Also Read - Kisan Andolan: राकेश टिकैत ने फिर दी चेतावनी! कानून वापस नहीं हुआ तो संसद का करेंगे घेराव, इस बार 4 लाख नहीं बल्कि...

उन्होंने कहा कि वीडियो में केजरीवाल को मोदी की तारीफ करते हुए दिखाया है, जबकि ऐसी कोई बात नहीं है. यह वीडियो प्रामाणिक नहीं है. इसके साथ छेड़छाड़ की गई है. वीडियो को अपने अनुकूल दिखाने के लिए उन्होंने इसे संपादित किया है. केजरीवाल के शब्दों को भी तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया है.

सिसोदिया ने कहा, “पीएम मोदी जानते हैं कि जनता केवल केजरीवाल की ही बातों पर यकीन करेगी, इसीलिए उन्होंने वीडियो के साथ छेड़छाड़ की है. भाजपा के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए हम अपने कानूनी विशेषज्ञों से परामर्श कर रहे हैं.” इस वीडियो में केजरीवाल कृषि कानून के बारे में बोलते हुए दिख रहे हैं. सिसोदिया ने सोशल मीडिया में ओरिजिनल वीडियो साझा किया है.

सिसोदिया ने कहा कि आज बीजेपी की विश्वसनीयता इतनी गिर गई है कि अपनी सरकार के कानूनों की सफाई में उन्हें अरविंद केजरीवाल के एडिट किए गए वीडियो का सहारा लेना पड़ रहा है.

सिसोदिया के मुताबिक किसानों को यह बात समझ में आ चुकी है कि उनके साथ धोखा हुआ है. जब बीजेपी उन्हें समझाने में विफल रही, तो पहले किसानों को गद्दार घोषित किया गया, फिर उन्हें खालिस्तानी कहा गया.

दरअसल, मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने एक चैनल को दिए इंटरव्यू में किसान कानून के पक्ष में गिनाए जा रहे फायदों को फैक्ट और तर्क से खारिज किया था. उस इंटरव्यू के वीडियो को एडिट कर सोशल मीडिया में वायरल कर दिया गया.