नई दिल्ली. वर्ष 2007 में 18 फरवरी को दिल्ली से लाहौर के बीच चलने वाली समझौता एक्सप्रेस ट्रेन में हुए धमाके के मामले में एनआईए की विशेष अदालत (NIA Court) ने बुधवार को फैसला सुना दिया. कोर्ट ने इस मामले में सभी 4 आरोपियों को बरी कर दिया है. इन चार आरोपियों में असीमानंद, लोकेश शर्मा, कमल चौहान और राजिंदर चौधरी शामिल थे. आपको बता दें कि ट्रेन में हुए विस्फोट में 68 लोगों की मौत हो गई थी, जिसमें से अधिकतर पाकिस्तानी नागरिक थे. धमाके में 43 पाकिस्तानी लोगों की मौत के बाद 20 फरवरी 2007 को हरियाणा पुलिस ने इस मामले की जांच के लिए SIT का गठन किया था. SIT की जांच में ही असीमानंद का नाम सामने आया था. यह पहला मामला नहीं है जब एनआईए की विशेष अदालत ने असीमानंद को बरी किया है. इसके पहले हैदराबाद ब्लास्ट, अजमेर शरीफ धमाका और मालेगांव धमाकों के मामले में भी असीमानंद को सबूतों के अभाव में बरी किया जा चुका है.

समझौता एक्सप्रेस केस: कोर्ट अब 14 मार्च को सुनाएगी फैसला, ब्लास्ट में मारे गए थे 43 पाकिस्तानी

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हरियाणा के पंचकुला स्थित NIA की विशेष अदालत ने बुधवार को जिस मामले पर फैसला सुनाया, उस मुकदमे की सुनवाई पिछले कई वर्षों से चल रही थी. स्पेशल कोर्ट ने बीते दिनों मामले की अंतिम सुनवाई के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था. गौरतलब है कि हरियाणा के पानीपत के पास 2007 में भारत-पाकिस्तान के बीच चलने वाली इस ट्रेन में धमाके हुए थे. इस मामले के मुख्य आरोपी 72 वर्षीय असीमानंद के खिलाफ विस्फोट संबंधी कई और मुकदमे भी दायर किए गए थे. लेकिन एनआईए की स्पेशल कोर्ट ने इन मामलों में असीमानंद को क्लीनचिट दे दी थी. मूल रूप से गुजरात के रहने वाले असीमानंद वनवासी कल्याण आश्रम के प्रमुख थे. इससे पहले वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से भी जुड़े हुए थे.

समझौता एक्सप्रेस विस्फोट मामले के आरोपी असीमानंद का नाम सिर्फ इसी प्रकरण में नहीं, बल्कि कई अन्य आतंकी धमाकों में भी सामने आ चुका है. असीमानंद के खिलाफ हैदराबाद की मक्का मस्जिद ब्लास्ट और अजमेर दरगाह में हुए धमाकों को लेकर भी मुकदमे दायर हुए थे. असीमानंद का नाम वर्ष 2006 और 2008 के मालेगांव विस्फोट में भी सामने आया था. लेकिन सभी मामलों में उसे विभिन्न अदालतों से बरी कर दिया गया. हैदराबाद की मक्का मस्जिद में 18 मई 2017 को बम विस्फोट हुआ था. इस घटना में 9 लोगों की मौत हो गई थी. धमाकों को लेकर असीमानंद पर मुकदमा चला, लेकिन अदालत में आरोपियों पर लगा कोई भी आरोप साबित नहीं हो पाया. इसके अलावा अजमेर के ख्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती की दरगाह में वर्ष 2007 में ही 11 अक्टूबर को बम विस्फोट हुआ था. घटना में तीन लोगों की मौत हो गई थी. इस मामले में भी असीमानंद को सबूतों के अभाव में कोर्ट ने बरी कर दिया था.