नई दिल्ली: समझौता एक्सप्रेस में बम विस्फोट के मामले के आरोपी असीमानंद सहित अन्य तीन आरोपियों को सजा होगी या बरी होंगे, इस पर फैसला अब 14 मार्च को होगा. कोर्ट ने इस मामले का फैसला 14 मार्च के लिए सुरक्षित रखा है. असीमानंद सहित अन्य तीनों आरोपी आज हरियाणा की पंचकुला स्थित स्पेशल एनआईए कोर्ट में पेश हुए थे. इस मामले में असीमानंद के अलावा आरोपी कमल चौहान, लोकेश शर्मा व राजिंदर चौधरी भी पंचकुला की एनआईए कोर्ट में पहुंचे थे. उम्मीद जताई जा रही थी कि आज कोर्ट इस मामले में फैसला सुना देगी.

ट्रेन में हुआ था ब्लास्ट, 68 लोगों की हुई थी मौत, 43 थे पाकिस्तानी
नई दिल्ली व पाकिस्तान के लाहौर के बीच चलने वाली समझौता एक्सप्रेस में 18 फरवरी, 2007 को हुए विस्फोट में 68 लोगों की मौत हो गई थी, इसमें ज्यादातर पाकिस्तानी थे. करीब 43 पाकिस्तानी लोगों की मौत हुई थी. 20 फरवरी, 2007 को इस मामले की जांच के लिए हरियाणा पुलिस ने एसआईटी का गठन किया था. इसमें असीमानंद का नाम आया था.

पानीपत के पास हुआ था ब्लास्ट
समझौता एक्सप्रेस में ब्लास्ट हरियाणा के पानीपत के निकट हुआ था. करीब 72 साल के असीमानंद पर विस्फोट संबंधी कई और मुक़दमे थे, जिनमें उन्हें पहले ही बरी किया जा चुका है. इस समय असीमानंद अब सिर्फ 2007 के समझौता एक्सप्रेस ट्रेन विस्फोट मामले में मुकदमे का सामना कर रहे थे. गुजरात निवासी और वनवासी कल्याण आश्रम के प्रमुख असीमानंद पूर्व में राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ (आरएसएस) से जुड़े थे.

असीमानंद का इन मामलों में भी आया था नाम, सबमें हुआ बरी
इससे पहले 16 अप्रैल, 2018 को एनआईए की विशेष अदालत ने हैदराबाद में स्वामी असीमानंद व दक्षिणपंथी हिंदू शाखा के चार सदस्यों को मक्का मस्जिद विस्फोट मामले में दोषमुक्त कर दिया था. दोषमुक्त करते हुए तब अदालत ने कहा था कि आरोपियों के खिलाफ लगाए गए कोई भी आरोप साबित नहीं हुए. बता दें कि प्रसिद्ध चारमीनार के पास मक्का मस्जिद में 18 मई, 2017 को जुमे की नमाज के दौरान हुए विस्फोट में नौ लोगों की मौत हो गई थी. विस्फोट के बाद मस्जिद के बाहर जमा भीड़ पर गोलीबारी में पांच लोगों की मौत हो गई थी.

इसके साथ ही 8 मार्च, 2017 को भी असीमानंद को राजस्थान के जयपुर में एनआईए की एक अन्य अदालत ने अजमेर दरगाह विस्फोट मामले में साक्ष्यों के अभाव में दोषमुक्त कर दिया गया था. इस मामले में 6 अन्य को भी दोष मुक्त किया गया था. इस मामले में तीन लोगों को दोषी करार दिया गया था. इसमें भवेश पटेल, देवेंद्र गुप्ता व सुनील जोशी शामिल थे. जोशी की 2007 में हत्या हो गई थी. बता दें कि अजमेर के ख्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती की 13वीं शताब्दी की दरगाह में 11 अक्टूबर, 2007 को हुए विस्फोट में तीन लोगों की मौत हो गई थी.

इन मामलों के अलावा असीमानंद का नाम 2006 व 2008 के मालेगांव विस्फोट में भी सामने आया था. महाराष्ट्र के मालेगांव में आठ सितंबर, 2006 को एक मस्जिद में हुए विस्फोट सहित तीन स्थानों पर विस्फोट हुए थे, जिनमें 37 लोगों की मौत हो गई थी. इसके बाद 29 सितंबर, 2008 को हुए दो बम विस्फोटों में सात लोगों की मौत हो गई थी. हालांकि, एनआईए ने 2013 की अपने आरोप-पत्र में 2006 के मालेगांव विस्फोट मामले में असीमानंद का कोई संबंध नहीं पाने पर मामले से नाम बाहर कर दिया था. असीमानंद ने 2010 में कथित तौर पर कबूल किया था कि वह व दूसरे दक्षिणपंथी कार्यकर्ता ‘मुस्लिमों के आतंकी कार्यो’ के खिलाफ पूरे देश में धर्मस्थलों पर हुए विस्फोटों में शामिल थे. बाद में उन्होंने अपना बयान बदल लिया और कहा कि उन पर यातना व दबाब डालकर गलत बयान दिलाया गया था.