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बरवाला (हरियाणा), 24 नवंबर | कानून से बचने की कोशश के बाद आखिरकार देशद्रोह, हत्या और अन्य मामलों में सलाखों के पीछे पहुंचे हरियाणा के स्वयंभू संत रामपाल कुछ समय पहले अपने पंथ को विस्तार देने की पूरी योजना बना ली थी।  पुलिस और जिला प्रशासन विवादित संत को मिले धन के स्रोत की जांच कर रही है। इसी धन की बदौलत पंथ विस्तार योजना को कार्यरूप दिया जाना था। Also Read - हत्या के दो मामले में रामपाल दोषी, हिसार में बढ़ाई गई सुरक्षा

रामपाल की महात्वाकांक्षी योजना पर अधिकारी हालांकि कुछ नहीं बोल रहे हैं, लेकिन संकेत मिल रहे हैं कि रामपाल अपनी योजना में 100 से 150 करोड़ रुपये निवेश कर रहे थे।  अपने पंथ की बढ़ती लोकप्रियता और अनुयायियों की बढ़ती संख्या को देखते हुए रामपाल और उनके करीबी सहयोगियों को हरियाणा के हिसार जिले में बरवाला के नजदीक 12 एकड़ जमीन पर बना सतलोक आश्रम अपर्याप्त लगने लगी। Also Read - asaram said i am a donkey in talks with media | पत्रकार के सवाल से भड़के आसाराम, कहा- संत नहीं गधा हूं मैं

जिला प्रशासन के सूत्रों ने आईएएनएस को बताया कि रामपाल और उसके सहयोगियों ने विशाल आश्रम के लिए एक जगह 50 एकड़ और एक जगह 10 एकड़ जमीन देख ली थी।  सूत्रों के अनुसार, रामपाल के सहयोगियों ने सतलोक आश्रम के नजदीक 52 एकड़ जमीन खरीदने के लिए ग्रामीणों के साथ पैसे के लेनदेन पर काम किया था। एक ग्रामीण श्याम लाल ने आईएएनएस को बताया, “उन्होंने 52 एकड़ जमीन के सौदे पर काम किया था और 15 नवंबर से पहले जमीन की रजिस्ट्री कराना चाहते थे। जमीन मालिकों को शुरुआती पैसे दिए गए थे। हालांकि, उनको लेकर विवाद शुरू हुआ, जिसके बाद सौदा नहीं हो पाया। उन्हें बाजार से दोगुनी कीमत पर जमीन दी गई थी।”

जांच में शामिल पुलिस अधिकारियों ने कहा कि रामपाल अपने पंथ को न सिर्फ हरियाणा, बल्कि दूसरे राज्यों में भी विस्तार देना चाहते थे। रामपाल दक्षिण मध्य प्रदेश के बेतुल में आश्रम बनवा रहे थे। 70 एकड़ में बन रहे आश्रम में 50,000 अनुयायियों के रहने की व्यवस्था होती। रामपाल के मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, बिहार और हरियाणा में अनुयायी हैं।

रामपाल के लिए अच्छे वक्त की शुरुआत हरियाणा के रोहतक जिले के कारोंथा में सतलोक आश्रम स्थापित करने के बाद हुई है। लेकिन 2006 आर्य समाज के अनुयायियों के साथ हुए बड़े विवाद के बाद उन्हें करोंथा आश्रम छोड़ना पड़ा। इस दौरान हिंसा हुई थी और कुछ लोगों को जान भी गंवानी पड़ी थी।