कोलकाता, 30 जनवरी | तृणमूल कांग्रेस के महासचिव और पूर्व रेल मंत्री मुकुल रॉय शुक्रवार को शारदा घोटाला मामले में पूछताछ के लिए केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) के समक्ष उपस्थित हुए। रॉय ने साल्ट लेक इलाके में सीजीओ परिसर स्थित सीबीआई कार्यालय में जाते समय कहा, “मैं यहां सीबीआई के साथ सहयोग करने आया हूं।” पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के काफी करीबी सहयोगी रॉय ने कहा कि उन्होंने कुछ गलत नहीं किया है।

उन्होंने कहा, “मैंने अपनी जिंदगी में कभी भी बेईमानी नहीं की है।” सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के बाद मामले की जांच कर रही सीबीआई ने 12 जनवरी को रॉय को सम्मन जारी किया था और वह दो बार सीबीआई के समक्ष उपस्थित होने से बच गए थे। सम्मन जारी होने के बाद रॉय बार-बार दिल्ली का दौरा कर रहे थे और अपने वकीलों से बात कर रहे थे, क्योंकि उनकी पार्टी सर्वोच्च न्यायालय से यह मांग कर रही है कि सीबीआई जांच सर्वोच्च न्यायालय की निगरानी में हो।

इससे पहले, सीबीआई दफ्तर के लिए निकलने के दौरान मध्य कोलकाता में उनके आवास पर तृणमूल कार्यकर्ताओं ने ‘मुकुल रॉय जिदाबाद’, ‘ममता बनर्जी जिंदाबाद’ के नारे लगाए।  कार्यकर्ताओं ने कहा, “तृणमूल के खिलाफ सीबीआई साजिश समाप्त की जाए।” उल्लेखनीय है राज्य के परिवहन मंत्री मदन मित्रा सहित तृणमूल के चार नेता इस मामले में जेल में हैं, जबकि सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय ने पार्टी के अन्य सांसदों और विधायकों से पूछताछ की है।

तृणमूल कांग्रेस के निलंबित राज्यसभा सदस्य कुणाल घोष को घोटाले में उनकी कथित भूमिका के लिए गिरफ्तार किया गया था और उन्होंने रॉय की संलिप्तता का दावा किया था।  कभी रॉय के करीबी रहे और शारदा घोटाला मामले में जेल में बंद आसिफ खान ने भी रॉय पर गड़बड़ी का आरोप लगाया है।  तृणमूल को हाल के चुनावों में मिली जीत का श्रेय रॉय को दिया गया है। शारदा समूह के प्रमुख सुदिप्त सेन के साथ फोन पर हुई बातचीत और मुलाकात के कारण रॉय आलोचनाओं का सामना कर रहे थे।

लेकिन रॉय और तृणमूल ने सभी आरोपों का मजबूती से खंडन किया है।