नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने बहुचर्चित सारदा चिट फंड घोटाले से संबंधित एक मामले में पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम की पत्नी और सीनियर एडवोकेट नलिनी चिदंबरम के खिलाफ कोई भी दंडात्मक कार्रवाई करने से शुक्रवार को प्रवर्तन निदेशालय को रोक दिया. जस्टिस एके सीकरी और जस्टिस अशोक भूषण की पीठ ने मद्रास हाईकोर्ट के एक आदेश के खिलाफ नलिनी चिदंबरम की याचिका पर सुनवाई के दौरान प्रवर्तन निदेशालय को नोटिस भी जारी किया. सारधा चिट फंड घोटाला में सुप्रीम कोर्ट ने मद्रास उच्च न्यायालय के आदेश पर रोक लगा दी, जिसने ईडी को नलिनी चिदंबरम को बुलाया. अदालत ने गिरफ्तारी से अंतरिम सुरक्षा भी बढ़ा दी.

बता दें कि हाईकोर्ट ने 10 जुलाई को सारदा प्रकरण से संबंधित एक मामले में नलिनी चिदंबरम के नाम प्रवर्तन निदेशालय के समन को चुनौती देने वाली उनकी याचिका खारिज कर दी थी. नलिनी चिदंबरम ने अपनी अपील में दलील दी थी कि यदि मुवक्किलों को कानूनी सलाह देने वाले वकीलों को इस तरह से समन भेजने की प्रवृत्ति को शुरू में नहीं रोका गया तो इसके परिणाम घातक हो सकते हैं.
– इससे पहले, हाईकोर्ट के एकल न्यायाधीश की पीठ ने भी प्रवर्तन निदेशालय के समन को चुनौती देने वाली उनकी याचिका खारिज कर दी थी.
– हाईकोर्ट ने कहा था कि मनी लॉन्ड्रिंग प्रिवेंशन एक्ट की धारा 50 (2) में प्राधिकारी को ऐसे किसी भी व्यक्ति को तलब करने का अधिकार है, जिसकी उपस्थिति जांच के लिए जरूरी महसूस की जा रही हो.

-कोर्ट ने इस दलील को भी ठुकरा दिया था कि आईपीसी की धारा 160 एक महिला को उनके निवास वाले स्थान से बाहर जांच के लिए नहीं बुलाया जा सकता.
– अदालत ने कहा था कि वह आईपीसी की धारा 160 का उपयोग नहीं कर सकती.

– ईडी ने नलिनी चिदंबरम को अपने कोलकाता कार्यालय में पेश होने के लिए पहला समन 7 सितंबर, 2016 को जारी किया था
– फिर एकल न्यायाधीश के आदेश के बाद नए समन जारी किए गए थे
– आरोप है कि नलिनी चिदंबरम को अदालत और एक टेलीविजन चैनल खरीदने के सौदे के सिलसिले में कंपनी लॉ बोर्ड में पेश होने के लिए सारदा समूह ने उन्हें एक करोड़ रुपए बतौर फीस दिए थे.