कोलकाता, 16 फरवरी | पश्चिम बंगाल में करोड़ों रुपये के शारदा चिटफंड घोटाले में कथित संलिप्तता को लेकर जेल में बंद तृणमूल कांग्रेस के नेता व भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) के पूर्व अधिकारी रजत मजूमदार को सोमवार को कलकत्ता उच्च न्यायालय से जमानत मिल गई। मजूमदार तृणमूल के पहले नेता थे, जिन्हें केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने नौ सितंबर, 2014 को गिरफ्तार किया था। उन्हें न्यायाधीश सुब्रो कमल मुखर्जी व न्यायाधीश इंद्रजीत चटर्जी की पीठ ने जमानत दी। यह भी पढ़ें– शारदा घोटाला : सीबीआई हिरासत में भेजे गए मतंग सिंह

मजूमदार के वकील मिलन मुखर्जी ने दलील दी कि घोटाले में उनकी संलिप्तता को लेकर सीबीआई ने अभी तक कोई सबूत नहीं दिया है, वहीं सीबीआई के वकील ने याचिका का विरोध करते हुए कहा कि मजूमदार एक प्रभावशाली व्यक्ति हैं और सबूतों से छेड़छाड़ कर सकते हैं।  न्यायालय ने हालांकि तृणमूल नेता की जमानत याचिका को सशर्त स्वीकार कर लिया।

मजूमदार के वकील ने कहा, “उन्हें एक लाख रुपये के मुचलके पर सशर्त जमानत मिली है। न्यायालय ने उन्हें कोलकाता और उत्तर 24 परगना जिले से बाहर नहीं जाने के निर्देश दिए हैं। साथ ही, सप्ताह में एक बार उन्हें जांच एजेंसी के समक्ष उपस्थित होने का निर्देश दिया गया है।” प्रदेश के पूर्व पुलिस महानिदेशक तृणमूल के दूसरे नेता हैं, जिन्हें इस मामले में जमानत मिली है।

इससे पहले, तृणमूल कांग्रेस से पूर्व राज्यसभा सदस्य सृंजय बोस को चार फरवरी को जमानत मिली थी। उन्हें 75 दिन जेल में गुजारना पड़ा था। जमानत मिलने के तुरंत बाद ही बोस ने पार्टी व राज्यसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था। सीबीआई ने 17 नवंबर को दाखिल अपने आरोप पत्र में मजूमदार पर षड्यंत्र रचने, धोखाधड़ी व फंड का दुरुपयोग करने का आरोप लगाया था।

मजूमदार सेवानिवृत्ति के बाद शारदा समूह में सुरक्षा सलाहकार के तौर पर काम करने के साथ ही वह तृणमूल कांग्रेस में शामिल हुए और साल 2013 में बीरभूम में हुए पंचायत चुनाव के दौरान पार्टी की तरफ से चुनाव पर्यवेक्षक के रूप में अपनी सेवा दी।