सरवना भवन रेस्टोरेंट चेन का मालिक पी राजगोपाल का चेन्नई के एक अस्पताल में निधन हो गया है. राजगोपाल वर्ष 2001 में अपने एक कर्मचारी के अहरण और उसकी हत्या मामले में दोषी करार दिया गया था. इस अपराध में उसको आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी. उसने इस सजा को भुगतने के लिए नौ जुलाई को मद्रास हाईकोर्ट के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया था. 72 वर्षीय राजगोपाल ने स्वास्थ्य कारणों से सजा स्थगित कराने के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने सजा को बरकरार रखा था. राजगोपाल को अपने कर्मचारी प्रिंस संतकुमार की हत्या के मामले में दोषी ठहराया गया था.

राजगोपाल ने सर्वोच्च न्यायालय में समर्पण करने के लिए समय देने की अर्जी लगाई थी. शीर्ष न्यायालय के इनकार करने के कुछ घंटों बाद ही उसने समर्पण कर दिया था. वह यहां अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश की अदालत में एक ऑक्सीजन मास्क के साथ एक एम्बुलेंस में आया था और व्हीलचेयर में ही न्यायाधीश के सामने पेश हुआ था. इससे पहले चिकित्सा का हवाला देते हुए सजा स्थगित करने की राजगोपाल की मांग को सुप्रीम कोर्ट ने ठुकरा दिया था. शीर्ष अदालत ने राजगोपाल के वकील को फटकार लगाई कि अगर वह इतने बीमार था, तो सुनवाई के दौरान उसने उसकी बीमारी का जिक्र क्यों नहीं किया. अदालत ने उन्हें कोई राहत नहीं दी.

72 वर्षीय राजगोपाल ने यह भी मांग की थी कि उसे जेल भेजे जाने से छूट दी जाए और उनके अस्पताल में भर्ती होने को जेल की सजा समझा जाए, जिससे अदालत सहमत नहीं हुई. देश और विदेशों में लोकप्रिय रेस्तरां चेन के संस्थापक राजगोपाल को एक सत्र अदालत ने संतकुमार की हत्या के आरोप में 10 साल जेल की सजा सुनाई थी. राजगोपाल, अपने कर्मचारी संतकुमार की पत्नी से शादी करके उसे अपनी तीसरी पत्नी बनाना चाहता था. जब महिला ने प्रस्ताव ठुकरा दिया, तो उसने उसके पति को मरवा दिया. सत्र अदालत के निर्णय के खिलाफ उसने मद्रास हाईकोर्ट में अपील की, लेकिन यहां उसकी सजा उम्रकैद तक बढ़ा दी गई. शीर्ष अदालत ने मार्च में सजा बरकरार रखी थी और उसे सात जुलाई को समर्पण करने को कहा था. उसने बीमारी का हवाला देते हुए सात जुलाई को सजा स्थगित करने के लिए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया, जहां से उसे निराशा ही हाथ लगी.