नई दिल्ली: ‘लौह पुरुष’ के नाम से मशहूर सरदार वल्लभ भाई पटेल की विशालकाय प्रतिमा ‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी’ का बुधवार को पीएम मोदी आनावरण करेंगे. दुनिया की इस सबसे ऊंची प्रतिमा का आनावरण सरदार पटेल की जयंती पर किया जाएगा. 182 मीटर ऊंची यह विशाल प्रतिमा देश के पहले गृह मंत्री पटेल को श्रद्धांजलि होगी जिन्होंने 1947 के विभाजन के बाद राजाओं-नवाबों के कब्जे वाली रियासतों को भारत संघ में मिलाने में अहम योगदान दिया था. यह प्रतिमा मौजूदा समय में विश्व की सबसे ऊंची प्रतिमा चीन के स्प्रिंग टेम्पल ऑफ बुद्ध से भी 29 मीटर ऊंची है. चीन की प्रतिमा की ऊंचाई 153 मीटर है. सरदार पटेल की प्रतिमा न्यूयॉर्क स्थित 93 मीटर ऊंची स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी से लगभग दोगुना है.

1.विंध्याचल व सतपुड़ा की पहाड़ियों के बीच नर्मदा नदी के साधु बेट टापू पर बनी दुनिया की सबसे ऊंची इस मूर्ति को बनाने में करीब 2389 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं.
2.स्टैच्यू ऑफ यूनिटी से राज्य के पर्यटन विभाग को बहुत फायदा होगा. इसके बनने से प्रतिदिन करीब 15000 पर्यटक के यहां आने की संभावना है.
3.ऑनलाइन टिकटों की बिक्री शुरू हो गई है. Observation Deckview के लिए टिकट की कीमत 350 रुपए है. बस के लिए 30 रुपए अलग से देने होंगे.
4.सामान्य एंट्री टिकट 120 रुपए है जबकि बस चार्ज 30 रुपए है.
5.153 मीटर ऊपर स्थित गैलरी में 200 पर्यटकों को समायोजित किया जा सकता है.
6.250 इंजीनियर और 3400 श्रमिक इस परियोजना पर काम कर रहे हैं. इसमें दो हाई स्पीड लिफ्ट भी होंगी जिससे एक समय में करीब 40 लोग गैलरी तक जा सकते हैं.
7.यहां एक संग्रहालय में सरदार पटेल के जीवन से जुड़ी घटनाओं पर लाइट एंड साउंड शो भी होगा.
8.स्टैच्यू के ऊपरी हिस्से में 306 मीटर पैदल पथ को पूरी तरह से मार्बल से तैयार किया गया है. इसके अलावा दिव्यांगों और वरिष्ठ नागरिकों के लिए भी पैदल पथ होगा.
9.प्रतिमा के पास स्थित पहाड़ियों पर फूलों को लगाया जा रहा है जिससे यहां से नजारा ‘फूलों की घाटी’ जैसा दिखेगा.
10.कंस्ट्रक्शन कंपनी लार्सन एंड टर्बो द्वारा बनाई गई स्टैच्यू ऑफ यूनिटी परियोजना को दिसंबर 2014 में शुरू किया गया था जिसे 42 महीनों को अंदर पूरा किया जाना था.
11. इसकी डिजाइन के काम के कारण इसके निर्माण की अवधि को और चार महीने के लिए बढ़ा दिया गया था.

75 हजार आदिवासी करेंगे विरोध
स्टैच्यू ऑफ यूनिटी के निकट स्थित गांवों के हजारों ग्रामीण इस परियोजना के विरोध में भारी प्रदर्शन करने की तैयारी में हैं. नर्मदा जिला के केवड़िया में स्थानीय आदिवासी संगठनों ने कहा कि ‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी’ परियोजना से प्रभावित लगभग 75,000 आदिवासी प्रतिमा के अनावरण और प्रधानमंत्री का विरोध करेंगे. आदिवासी नेता डॉक्टर प्रफुल वसावा ने कहा कि उस दिन हम शोक मनाएंगे और 72 गांवों में किसी घर में खाना नहीं पकाया जाएगा. वह परियोजना हमारे विनाश के लिए है.

आदिवासी रिवाज के अनुसार, घर में किसी की मृत्यु होने पर शोक के तौर पर घर में खाना नहीं पकाया जाता है. वसावा के अनुसार, ‘असहयोग आंदोलन’ को प्रदेश के लगभग 100 छोटे-बड़े आदिवासी संगठन समर्थन दे रहे हैं. विरोध प्रदर्शन में उत्तरी गुजरात के बनसकांठा से दक्षिणी गुजरात के डांग्स जिले तक लगभग नौ आदिवासी जिले आंदोलन में भाग लेंगे. उन्होंने कहा कि 31 अक्टूबर को ‘बंद’ सिर्फ स्कूलों, कार्यालयों या व्यावसायिक संस्थानों तक ही सीमित नहीं रहेगा, बल्कि घरों में भी (खाना ना पकाकर) विरोध किया जाएगा.