नई दिल्ली: भारतीय मूल के सत्य नडेला (Satya Nadella) दुनिया की सबसे बड़ी सॉफ्टवेयर कंपनी (world’s largest software company Microsoft) माइक्रोसॉफ्ट ( Microsoft)के चेयरमैन (chairman Microsoft) बनाए गए हैं. पर्सनल कंप्यूटर के क्षेत्र में क्रांति लाने वाली दुनिया की सबसे बड़ी सॉफ्टवेयर कंपनी माइक्रोसॉफ्ट के चेयरमैन बनाए गए सत्य नडेला को क्रिकेट का शौक जुनून की हद तक है, न चीजें सीखने की ललक ऐसी कि जितने ऑनलाइन कोर्स कर पाते हैं, उससे कहीं ज्यादा में नाम लिखवाते हैं, पढ़ने की चाह इतनी कि जितनी किताबें पढ़ पाते हैं, उससे कहीं ज्यादा खरीदते हैं और आगे बढ़ने की जिद ऐसी कि दुनिया की सबसे बड़ी सॉफ्टवेयर कंपनी में सबसे बड़े ओहदे पर पहुंच चुके हैं.Also Read - Investment in UP: यूपी के पांच जिलों में 32 NRI ने 1045 करोड़ रुपये का निवेश करने की इच्छा जताई

बिल गेट्स ने 1975 में पॉल एलन के साथ माइक्रोसॉफ्ट की स्थापना की और दुनिया भर में पर्सनल कंप्यूटर में क्रांति का चेहरा बने. सत्य नडेला ने पिछले 30 साल में माइक्रोसॉफ्ट को नई बुलंदियों तक पहुंचाने का काम किया और इसी का नतीजा है कि वह कंपनी के इतिहास के तीसरे चेयरमैन बनाए गए हैं. इससे पहले उन्हें 2014 में जब कंपनी का सीईओ बनाया गया था, तो उनके करोड़ों रुपए के वेतन का जिक्र करते हुए अखबारों के पहले पन्ने पर खबरें छपी थीं, जिनमें कहा गया था, ”भारतीय मूल के इंजीनियर सत्य नडेला टेक्नोलॉजी क्षेत्र की दिग्गज कंपनी माइक्रोसॉफ्ट की उस कुर्सी पर बैठेंगेख्‍, जिस पर कभी बिल गेट्स बैठा करते थे.” Also Read - भारतीय पत्रकार दानिश सिद्दीकी की कंधार में अफगान आर्मी और तालिबान की लड़ाई की कवरेज के दौरान मौत

सत्य नारायण नडेला का जन्म हैदराबाद के अनंतपुर जिले के उच्च शिक्षाप्राप्त तेलुगु परिवार में 19 अगस्त 1967 को हुआ था. उनकी मां संस्कृत की व्याख्याता और पिता प्रशासनिक सेवा में अधिकारी थे. नडेला ने अपनी स्कूली शिक्षा बेगमपेट के हैदराबाद पब्लिक स्कूल से पूरी करने के बाद वर्ष 1988 में कर्नाटक के मणिपाल इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में बीटेक किया. आगे की पढ़ाई के लिए वह अमेरिका चले गए और उन्होंने विस्कॉन्सिन यूनिवर्सिटी से मास्टर ऑफ साइंस और शिकागो यूनिवर्सिटी से एमबीए की पढ़ाई पूरी की. Also Read - Windows 11 हुआ लॉन्च, बदले हुए डिजाइन के साथ यूजर्स को मिलेंगे कई खास फीचर्स

‘क्लाउड गुरु’ कहलाने वाले नडेला ने 1990 में अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद कुछ समय सन माइक्रोसिस्टम के साथ काम किया और 1992 में युवा इंजीनियर के तौर पर माइक्रोसॉफ्ट से जुड़े तथा एक के बाद एक कई बड़ी उपलब्धियां हासिल कीं. तब कौन जानता था कि यह भोला सा चेहरा एक दिन बिल गेट्स की ही तरह माइक्रोसॉफ्ट का हस्ताक्षर बन जाएगा.

साल 2000 में सत्‍य नडेल को माइक्रोसॉफ्ट सेंट्रल का उपाध्यक्ष बनाया गया. उसके बाद उन्होंने कंपनी में कई बड़ी जिम्मेदारियां संभालीं और 2014 में सीईओ के पद पर पहुंचे. इस दौरान विंडो सर्वर, डेवलपर्स टूल, अज़ूर को विकसित करने में नडेला ने अहम भूमिका निभाई. हालांकि उनकी एक और पहल बिंग को उतनी सफलता नहीं मिल पाई.

माइक्रोसॉफ्ट में सफलता की सीढ़ियां चढ़ने के दौरान उन्हें 2019 में फाइनेंशियल टाइम्स पर्सन ऑफ द ईयर के अवार्ड से नवाजा गया और 2020 में वह ग्लोबल इंडियन बिजनेस आइकन चुने गए.

नडेला के पारिवारिक जीवन की बात करें तो उन्होंने 1992 में दो बड़े काम किए, एक तो माइक्रोसॉफ्ट में नौकरी और दूसरा अपने बचपन की दोस्त अनुपमा से शादी. नडेला के पिता की तरह अनुपमा के पिता भी भारतीय प्रशासनिक सेवा में अधिकारी रहे और दोनों आपस में दोस्त भी हैं. नडेला और अनुपमा के तीन बच्चे हैं जो अपने परिवार के साथ वॉशिंगटन में रहते हैं.