नई दिल्ली: नौसेना में पुरुष और महिला अधिकारियों के साथ समान व्यवहार किए जाने की बात पर जोर देते हुए उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को बल में महिला अधिकारियों के लिए स्थायी कमीशन को मंजूरी दे दी. न्यायमूर्ति डी. वाई. चंद्रचूड़ के नेतृत्व वाली एक पीठ ने कहा कि देश की सेवा करने वाली महिला अधिकारियों को स्थायी कमीशन देने से इनकार करने पर न्याय को नुकसान होगा. Also Read - कोरोना वायरस के बारे में सही सूचना के लिये 24 घंटे में पोर्टल बनाये केन्द्र: सुप्रीम कोर्ट

पीठ ने कहा कि केंद्र द्वारा वैधानिक अवरोध हटा कर महिलाओं की भर्ती की अनुमति देने के बाद नौसेना में महिला अधिकारियों को स्थायी कमीशन प्रदान करने में लैंगिक भेदभाव नहीं किया जा सकता. अदालत ने कहा, जब एक बार महिला अधिकारियों की भर्ती के लिए वैधानिक अवरोध हटा दिया गया तो स्थायी कमीशन देने में पुरुष और महिलाओं के साथ समान व्यवहार होना चाहिए. Also Read - Covid-19: कोरोना के चलते मजदूरों का पलायन, केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट से कहा- 23 लाख लोगों को दे रहे हैं खाना

अभी आर्मर्ड कोर, इन्फेंट्री, मैकेनाइज्ड इन्फेंट्री और तोपखाना कोर को महिलाओं के लिए नहीं खोला गया है :सरकार
भारतीय सेना में अभी आर्मर्ड कोर (एसी), इन्फेंट्री, मैकेनाइज्ड इन्फेंट्री और तोपखाना कोर को महिलाओं के लिए नहीं खोला गया है. सोमवार को रक्षा राज्य मंत्री श्रीपाद नाईक ने राज्यसभा में एक सवाल के लिखित जवाब में यह जानकारी दी.

रक्षा राज्य मंत्री नाईक ने ने बताया कि इसी प्रकार भारतीय नौसेना में महिलाओं को समुद्रगामी कार्यो अर्थात एक्जीक्यूटिव ब्रांच : सामान्य सेवा, पनडुब्बी हाइड्रो एवं सूचना प्रौद्योगिकी (इंजीनियरिंग शाखा) सामान्य सेवा एवं पनडुब्बी तथा इलैक्ट्रिकल शाखा में भर्ती नहीं किया जा रहा है.

इसी प्रकार इस समय भारतीय वायु सेना में वायु सैनिक संवर्ग में भर्ती केवल पुरूष अभ्यार्थियों के लिए की जाती है. मंत्री ने बताया कि भारतीय वायुसेना में सभी पद महिलाओं सहित सभी अधिकारियों के लिए खुले हैं, जो कि प्रचलित नीतियों के अनुसार रिक्तियां, इच्छा, उपयुक्तता, शारीरिक स्वस्थता तथा योग्यता के तहत उपलब्ध हैं.