नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट ने श्रमिकों के हितों से जुड़ा एक अहम निर्देश केंद्र सरकार को दिया है. शीर्ष ने सोमवार को केंद्र को निर्देश दिया कि वह निर्माण श्रमिकों की शिक्षा, स्वास्थ्य, सामाजिक सुरक्षा और पेंशन के मुद्दों का निराकरण करने के लिए 30 सितंबर से पहले आदर्श योजना लाए. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वे सिर्फ आधारभूत ढांचे का निर्माण नहीं करते हैं, बल्कि राष्ट्र का भी निर्माण करते हैं. जस्टिस मदन बी लोकुर और जस्टिस दीपक गुप्ता की पीठ ने श्रमिकों से जुड़े दो कानूनों के उल्‍लंघन पर सवाल किया और जल्‍द से जल्‍द श्रमिकों को बेहतर और गरिमापूर्ण जीवन जीने के लिए बेहतर योजना बनाने का निर्देश दिया. Also Read - विकास दुबे के एनकाउंटर से चंद घंटे पहले सुप्रीम कोर्ट में दायर हुई थी याचिका, हत्या की जताई गई थी आशंका, जानें सच

सरकार से कोर्ट का सवाल लाखों श्रमिक लाभ से वंचित क्‍यों
शीर्ष अदालत ने कहा कि निर्माण श्रमिकों के लाभ के लिए 37 हजार 400 करोड़ रुपए से अधिक का संग्रह किया गया है, लेकिन स्पष्ट रूप से उनके लाभ के लिए सिर्फ 9500 करोड़ रुपए का इस्तेमाल हुआ है. कोर्ट ने सवाल किया कि क्यों देशभर में लाखों श्रमिकों को शेष 28000 करोड़ रुपए के लाभ से वंचित किया जा रहा है? Also Read - तमिलनाडु सरकार ने कहा- मेडिकल, डेंटल सीटों पर अखिल भारतीय कोटा में ओबीसी आरक्षण लागू करने के लिए उठा रहे हैं कदम

दो श्रम कानूनों का उल्‍लंघन
शीर्ष अदालत ने सभी राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश दिया कि वे एक विशेषज्ञ समिति का गठन करें और 6 महीने के भीतर वैधानिक नियम लाएं. जस्टिस मदन बी लोकुर और जस्टिस दीपक गुप्ता की पीठ ने कहा कि कोर्ट द्वारा दो कानूनों- भवन एवं अन्य निर्माण श्रमिक (रोजगार नियमन एवं सेवा शर्त) अधिनियम, 1996 और भवन एवं अन्य निर्माण श्रमिक कल्याण उपकर अधिनियम, 1996 का उल्लंघन किया गया है. Also Read - आर्मी में वुमन ऑफिसर्स के स्थायी कमीशन का मामला: SC ने केंद्र को दिया एक माह का समय

गरिमा से जीवन जी सकें श्रमिक
सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने कहा, ”आदर्श योजना तैयार करते वक्त हम उम्मीद करते हैं कि श्रम एवं रोजगार मंत्रालय इसके भीतर शिक्षा, स्वास्थ्य, सामाजिक सुरक्षा, वृद्धावस्था एवं विकलांगता पेंशन और अन्य लाभ से संबंधित चिंताओं और मुद्दों को शामिल करेगा, जो भारत के संविधान के तहत गरिमा के साथ जीवन जीने के लिए जरूरी हैं.”

30 सितंबर 2018 तक हो तैयार आदर्श योजना 
पीठ ने कहा, ”हम यह भी उम्मीद करते हैं कि आदर्श योजना निर्धारित समयावधि के भीतर तैयार की जाएगी और उसका प्रचार किया जाएगा. इस पर श्रम एवं रोजगार मंत्रालय बेहतर होगा कि छह महीने के भीतर फैसला करे, लेकिन किसी भी सूरत में यह 30 सितंबर 2018 को या उससे पहले हो जाना चाहिए.” (इनपुट- एजेंसी)