नई दिल्ली: कांग्रेस के दो सांसदों ने चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा को पद से हटाने के लिए महाभियोग चलाने का नोटिस अस्वीकार करने के राज्यसभा के सभापति के निर्णय के खिलाफ दायर याचिका सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में वापस ले ली. दरअसल, संविधान पीठ ने करीब 45 मिनट की सुनवाई के बाद याचिका को खारिज घोषित कर दिया गया, क्योंकि इसे वापस ले ली गई थी. याचिका दायर करने वाले कांग्रेस के सांसदों की ओर अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने इस मामले में सुनवाई के लिए संविधान पीठ के गठन पर आपत्ति की. उन्होंने कहा कि वे जानना चाहते थे कि इस मामले को संविधान पीठ के समक्ष सूचीबद्ध करने का आदेश किसने दिया. लेकिन अटार्नी जनरल के.के. वेणुगोपाल ने कहा कि राज्यसभा सभापति को नोटिस देने वाले 50 सांसदों में से सिर्फ दो ने ही शीर्ष अदालत में याचिका दायर की है. Also Read - लोगों को लाने के लिए विमान का प्रयोग तो गरीबों के लिए बस का क्यों नहीं : कांग्रेस

इन सांसदों ने इतने संवेदनशील मामले की सुनवाई के लिए पांच सदस्यीय संविधान पीठ गठित करने पर सवाल भी उठाया. वेणुगोपाल ने कहा कि कांग्रेस के दो सांसदों ने यह याचिका दायर की है परंतु नोटिस देने वाले 6 अन्य विपक्षी दलों ने शीर्ष अदालत में सभापति के फैसले को चुनौती नहीं दी है.

कांग्रेसी सांसद प्रताप सिंह बाजवा और अमी हर्षदराय याज्ञनिक की याचिका पर सुनवाई के लिए जस्टिस एके सिकरी की अध्यक्षता में 5 सदस्यीय संविधान पीठ गठित की गई थी.संविधान पीठ के अन्य सदस्यों में जस्टिस एसए बोबडे, जस्टिस एनवी रमण, जस्टिस अरुण मिश्रा और जस्टिस आदर्श कुमार गोयल शामिल थे.

अटार्नी जनरल ने कहा, ”यह अनुमान लगाया जाता है कि दूसरे अन्य दलों ने नोटिस अस्वीकार करने के सभापति एम वेंकैया नाएडू के फैसले को चुनौती देने के कांग्रेस के दृष्टिकोण का समर्थन नहीं किया है.” उन्होंने दलील दी कि कांग्रेस के इन दो सांसदों को सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करने के लिए शेष सांसदों ने अधिकृत नहीं किया है.

प्रशासनिक आदेश की प्रति पाना मेरा संवैधानिक अधिकार : सिब्बल
सीजेआई के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव का नोटिस खारिज होने के बाद वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने कहा कि प्रशासनिक आदेश की प्रति हासिल करना उनका संवैधानिक अधिकार है और प्रति मिलने के बाद ही वह आगे के कदम के बारे में फैसला करेंगे. सिब्बल ने कहा, कल हमने याचिका दायर की थी और हम यही चाहते थे कि इस पर सुनवाई होनी चाहिए. कल शाम पता चला कि हमारी याचिका पर 5 जजों की पीठ सुनवाई करेगी. हमें पता नहीं किसने यह तय किया.

सिब्बल ने कोर्ट से किए ये सवाल
– पांच सदस्यीय पीठ के समक्ष मामले की सुनवाई का आदेश किसने पारित किया?
— हम जानना चाहते थे कि पांच न्यायाधीशों वाली पीठ को मामला भेजने का प्रशासनिक आदेश किसने पारित किया?
– हमसे कहा गया कि हम मामले की मेरिट पर बहस करें, लेकिन हमने कहा कि प्रशासनिक आदेश की प्रति मिले बिना हम कैसे बहस कर सकते हैं?
– आदेश की प्रति देने के बारे में कुछ नहीं बताया गया. फिर हमने अपनी याचिका वापस ले ली
– सरकार आरोप लगा रही है कि हम किसी के खिलाफ हैं और मामला राजनीतिक है मैं पूछना चाहता हूं कि इसमें क्या राजनीति है हम न्यायपालिका में विश्वास बनाये रखना चाहते हैं. इसीलिए हमने यह कदम उठाया
(इनपुट एजेंसी)