नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने तेल एवं प्राकृतिक गैस निगम (ओएनजीसी) में स्वतंत्र निदेशक के रूप में बीजेपी प्रवक्ता संबित पात्रा कि नियुक्ति पर केंद्र सरकार से जवाब मांगा है. एक याचिका पर सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने सरकार से इस पर जवाब दाखिल करने को कहा है. नवंबर 2017 में संबित पात्रा की नियुक्ति ओएनजीसी में स्वतंत्र निदेशक के रूप में हुई थी जिसका विरोध भी किया गया था. हालांकि, सरकार ने नियुक्ति को नियमसम्मत बताते हुए विरोध को खारिज कर दिया था. Also Read - जीवन बीमा कराने जा रहे हैं तो सुप्रीम कोर्ट की ये चेतावनी ज़रूर जान लें, मुश्किल नहीं होगी

संबित पात्रा की नियुक्ति पर पहले भी सवाल उठाए जा चुके हैं. नवंबर 2017 दिल्ली हाई कोर्ट में पात्रा की नियुक्ति के विरोध में याचिका दाखिल हुई थी. हालांकि कोर्ट ने ओएनजीसी के निदेशक मंडल में बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता संबित पात्रा की स्वतंत्र निदेशक के रूप में नियुक्ति के मामले में दखल देने से इनकार कर दिया था. अदालत ने उस जनहित याचिका को स्वीकार नहीं किया जिसमें शशि शंकर की ओएनजीसी के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक (सीएमडी) के रूप में नियुक्ति भी रद्द करने की मांग की गई थी.

एनर्जी वॉचडॉग नाम के एक गैर सरकारी संगठन (एनजीओ) ने स्वतंत्र निदेशक पद पर नियुक्ति के लिए पात्रा की योग्यता पर भी सवाल उठाए थे और आरोप लगाया था कि उन्हें नियुक्ति देने में उचित प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया. एनजीओ की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता जयंत भूषण ने कहा कि बीजेपी के प्रवक्ता एक चिकित्सक हैं और ओएनजीसी का चिकित्सा के क्षेत्र से कोई लेना-देना नहीं है.

केंद्र ने नियुक्ति का बचाव करते हुए कहा था कि पात्रा वंचित तबके के लिए एक एनजीओ का सफलतापूर्वक संचालित कर रहे हैं जो उनके प्रबंधन कौशल को दिखाता है और इसलिए वह इस पद के लिए योग्य भी हैं. एनजीओ के वकील ने यह भी कहा कि पात्रा को 23 लाख रूपये प्रतिवर्ष के वेतन पर नियुक्त करना क्या एक व्यक्ति के प्रति कुछ ज्यादा ही सरकारी दरियादिली दिखाना नहीं है?