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सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, सीजेआई का ऑफिस पब्लिक अथॉरिटी, आरटीआई के दायरे में आएगा
पीठ ने सुप्रीम कोर्ट के सेक्रेटरी जनरल और केंद्रीय लोक सूचना अधिकारी की अपील की खारिज
नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को अपनी महत्वपूर्ण व्यवस्था में कहा कि प्रधान न्यायाधीश का कार्यालय सूचना के अधिकार कानून के तहत सार्वजनिक प्राधिकार है. कोर्ट ने कहा कि न्यायाधीश भी पूरी तरह स्वतंत्रता से काम नहीं कर सकते, उन्हें भी नियम कानून के तहत काम करना होता है.
प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पीठ ने दिल्ली हाईकोर्ट के 2010 के फैसले को सही ठहराते हुए इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट के सेक्रेटरी जनरल और शीर्ष अदालत के केंद्रीय लोक सूचना अधिकारी की तीन अपील खारिज कर दी.
‘Transparency doesn’t undermine judicial independency’, Supreme Court says while upholding the Delhi High Court judgement which ruled that office of Chief Justice comes under the purview of Right to Information Act (RTI). https://t.co/axAjUFzDRr
— ANI (@ANI) November 13, 2019
न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़ ने कहा, न्यायाधीश भी पूरी तरह स्वतंत्रता से काम नहीं कर सकते, उन्हें भी नियम कानून के तहत काम करना होता है. पीठ ने आगाह किया कि सूचना के अधिकार कानून का इस्तेमाल निगरानी रखने के हथियार के रूप में नहीं किया जा सकता और पारदर्शिता के मसले पर विचार करते समय न्यायिक स्वतंत्रता को ध्यान में रखना होगा.
पीठ ने स्पष्ट किया कि कॉलेजियम द्वारा न्यायाधीशों के नामों की सिफारिशों की सिर्फ जानकारी दी जा सकती है और इसके कारणों की नहीं. न्यायमूर्ति रमण ने कहा कि न्यायपालिका की स्वतंत्रता को हनन से बचाया जाना चाहिए. न्यायमूर्ति जे.खन्ना के साथ सहमति जताने वाले न्यायमूर्ति एन वी रमण ने कहा कि निजता के अधिकार और पारदर्शिता के अधिकार के लिए संतुलित फार्मूला होना चाहिए.
न्यायमूर्ति संजीव खन्ना ने कहा : न्यायपालिका की स्वतंत्रता, पारदर्शिता साथ-साथ रहनी चाहिए. नियुक्ति के तरीके का न्यायपालिका की स्वतंत्रता पर प्रभाव पड़ता है.
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