नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने कोरोना वायरस महामारी के मद्देनजर देश की जेलों में क्षमता से अधिक कैदी होने और उनमें सुविधाओं का सोमवार को स्वत: संज्ञान लिया. सीजेआई एसए बोबडे और न्यायमूर्ति एल नागेश्वर राव की पीठ ने सभी राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों में जेल महानिदेशकों और मुख्य सचिवों को नोटिस जारी किए. न्यायालय ने इन सभी को 20 मार्च तक यह बताने का निर्देश दिया है कि कोविड-19 महामारी के मद्देनजर स्थिति से निबटने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं. Also Read - आशीष नेहरा ने लॉकडाउन को तेज गेंदबाजों के लिए बताया ज्‍यादा चुनौतीपूर्ण, ये है वजह

सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से कहा है कि वे इस मामले में शीर्ष अदालत की मदद के लिये 23 मार्च को एक एक अधिकारी तैनात करें. Also Read - Covid-19: राज्य, एयरलाइन, रेलवे 15 अप्रैल से चरणबद्ध तरीके से रोक हटाने पर कर रहे विचार, कुछ ऐसी है योजना

शीर्ष अदालत ने कहा कि जेलों में क्षमता से अधिक कैदी होने और इनमें उपलब्ध सुविधाओं के मामले का स्वत: संज्ञान लेने के कारणों को भी बताया जायेगा. सुप्रीम कोर्ट ने देश की जेलों में क्षमता से अधिक कैदियों के होने पर चिंता व्यक्त की और कहा कि बड़ी संख्या में लोगों का एक जगह होना बड़ी समस्या है और यह कोरोना वायरस फैलने का बड़ा कारण हो सकती है. Also Read - Covid-19: कोरोना के खिलाफ एकजुटता दिखाने के लिए आज दीप जलाएगा भारत, उपराष्ट्रपति ने देशवासियों से की अपील

शीर्ष अदालत ने कहा कि इस स्थिति को देखते हुये हमें कुछ दिशा निर्देश तैयार करने होंगे. यहीं नहीं, कोरोना वायरस के मद्देनजर जेलों में क्षमता से अधिक कैदी होने के मामले में भी दिशा निर्देश जारी करने की आवश्यकता है.

शीर्ष कोर्ट ने कहा कि कुछ राज्यों ने महामारी कोविड-19 के मद्देनजर कदम उठाए हैं लेकिन कुछ राज्य ऐसे भी ही हैं जिन्होंने उचित उपाय नहीं किए हैं.