नई दिल्‍ली: दिल्‍ली पुलिस और वकीलों का विवाद कम होने का नाम नहीं ले रहा है. राजधानी में मंगलवार को आईटीओ में पीएचक्‍यू के सामने करीब 11 घंटे तक नाराज पुलिसकर्मियों और जूनियर स्‍तर के अधिकारियों का धरना- प्रदर्शन चला. इस घटनाक्रम को लेकर एक सुप्रीम कोर्ट के वकील ने बुधवार को दिल्‍ली पुलिस कमिश्‍नर अमूल्‍य पटनायक को नोटिस जारी किया है. Also Read - Coronavirus in Delhi: दिल्ली में कोविड-19 के 213 नए मामले सामने आए, तीन महीने में सबसे कम

सीनियर वकील वरुण ठाकुर ने पुलिस कमिश्‍नर को दिल्‍ली पुलिस बल के जवानों और उनके अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं करने और प्रदर्शन में सक्रिय रूप से आईटीओ में पीएचक्‍यू के सामने शामिल होने पर नोटिस जारी किया है. Also Read - Farmers Protest Updates: किसानों ने दिल्‍ली पुलिस के 2 ASI से की थी मारपीट, FIR दर्ज

नोटिस में कहा गया कि पुलिस हेडक्‍वार्टर के सामने 11 बजे से प्रदर्शन कर रहे पुलिसकर्मियों और अफसरों को मीडिया के सामने उनकी मांगों को लेकर पुलिस कमिश्‍नर ने संबोधित करते हुए वकीलों और सिविल सोसाइटी में भय पैदा किया. दिल्‍ली पुलिस और उसके शीर्ष अफसरों ने भी पूरे दिन नेशनल मीडिया को एड्रेस किया और वकीलों के लिए अपमानजक बयान दिए. Also Read - Delhi Monsoon News: दिल्ली में मानसून सामान्य से 12 दिन पहले दे सकता है दस्तक

नोटिस में सीनियर वकील ने कहा कि ये अवैध धरना प्रदर्शन और आपके पुलिस बल की गैरजिम्‍मेदार गतिविधियां पुलिस फोर्सेस ( रेस्‍ट्र‍िक्‍शन ऑफ राइट) एक्‍ट 1966 के सेक्‍शन 3(1) (ए) (बी) (सी) और 3 (2) का स्‍पष्‍ट उल्‍लंघन है.

धरना प्रदर्शन का सीधा प्रसारण राष्‍ट्रीय मीडिया ने सार दिन किया. सेक्‍शन (3) पुलिस फोर्सेस के किसी भी धरना प्रदर्शन और प्रेस से अपनी मांगों के लिए संवाद करने का निषेध करता है. लेकिन हमने सारा दिन सार्वजनिक जगह पर ऐसी गैर कानूनी गतिविधियां देखी.

सीनियर वकील वरुण ठाकुर ने पुलिस कमिश्‍नर को भेजे अपने नोटिस में कहा है कि पुलिस बल का ऐसा गैरजिम्‍मेदाराना व्‍यवहार, मसल और पॉवर का सार्वजनिक प्रदर्शन करना सिविल सोसाइटी में भय पैदा करता है. ऐसी चीजें हमारे लोकतांत्रिक समाज के लिए बहुत ही खतरनाक हैं. नोटिस में धरना प्रदर्शन में भाग लेने वाले दिल्‍ली पुलिस के जवानों और अफसरों पर तुरंत कार्रवाई की मांग की गई है.