नई दिल्ली: बॉलीवुड अभिनेता संजय दत्त अभिनीत फिल्म मुन्ना भाई एमबीबीएस की तरह भोपाल स्थित एक मेडिकल कॉलेज ने फर्जी मरीजों को भर्ती किया, ताकि मेडिकल काउंसिल आफ इंडिया (एमसीआई) की न्यूनतम जरुरतों को पूरा किया जा सके. यह बात सीबीआई की एक जांच में सामने आई है. एजेंसी के जांच निष्कर्षों के आधार पर सुप्रीम कोर्ट ने आरकेडीएफ मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर को अगले दो वर्षों 2018-19 और 2019-20 के लिए उसके एमबीबीएस कोर्स के प्रथम वर्ष में प्रवेश लेने पर रोक लगा दी. सुप्रीम कोर्ट ने इसके साथ ही सेक्रेटरी जनरल को कॉलेज के डीन एस.एस. कुशवाहा के खिलाफ अभियोजन शुरू करने और धोखाधड़ी करने के लिए पांच करोड़ रुपए का जुर्माना लगाने का निर्देश दिया. कोर्ट ने कॉलेज को छात्रों की ओर से शैक्षणिक वर्ष 2017-2019 के लिए भुगतान की गई फीस प्रति छात्र एक लाख रुपए क्षतिपूर्ति के साथ वापस करने का भी निर्देश दिया.

जांच में यह पता चला कि कॉलेज ने हेरफेर करके और गढ़े हुए रिकार्ड दायर करके सुप्रीम कोर्ट को गुमराह किया. एक अधिकारी ने कहा, कॉलेज की ओर से अस्पताल में मरीजों के असली होने के बारे में किया गया दावा, उस समिति की जांच में झूठा निकला, जिसमें सीबीआई के अधिकारी और चिकित्सक विशेषज्ञ शामिल थे.

केंद्र सरकार और मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया ने कॉलेज में कदाचार तथा एमबीबीएस छात्रों को शिक्षा प्रदान करने के लिए पर्याप्त आधारभूत ढांचा एवं मरीज नहीं होने का उल्लेख सुप्रीम कोर्ट के समक्ष किया था. इसका कॉलेज की ओर से खंडन किया गया था और उसने सरकार एवं एमसीआई की रिपोर्ट को चुनौती दी थी.

कॉलेज के खिलाफ आरोपों के सत्यापन के लिए उच्चतम न्यायालय ने 2017 में सीबीआई निदेशक की ओर से प्रतिनियुक्त एक वरिष्ठ अधिकारी के नेतृत्व में और एम्स निदेशक द्वारा सुझाये गए दो चिकित्सकों वाली एक समिति गठित की थी. सीबीआई ने एक प्रारंभिक जांच दर्ज की और अपनी रिपोर्ट पिछले वर्ष सुप्रीम न्यायालय के समक्ष पेश की जिसमें एम्स चिकित्सकों का विचार भी शामिल था.