नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि मुकदमों के तेजी से निबटारा करने की प्रक्रिया में कभी भी न्याय के मकसद की ‘बलि’ नहीं दी जानी चाहिए. शीर्ष अदालत ने एक नाबालिग लड़की से बलात्कार और उसकी हत्या के मामले की सुनवाई दो सप्ताह के भीतर पूरी करके आरोपी को मौत की सजा सुनाने का फैसला निरस्त करते हुए यह टिप्पणी की.

बता दें कि इस मामले आरोपी को चार फरवरी, 2013 को गिरफ्तार किया गया और चंद दिनों के भीतर ही 13 फरवरी को पुलिस ने अदालत में आरोप पत्र दाखिल कर दिया था और निचली अदालत ने आरोपी के खिलाफ 19 फरवरी, 2013 को आरोप निर्धारित किए और मुकदमे की सुनवाई पूरी करके चार मार्च को उसे मौत की सजा सुनाई थी.

मध्‍य प्रदेश हाईकोर्ट ने 27 जून, 2013 को दोषी की मौत की सजा बरकरार रखते हुए उसकी अपील खारिज कर दी थी.

जस्‍ट‍िस उदय यू ललित, जस्टिस इंदु मल्होत्रा और जस्टिस कृष्ण मुरारी की पीठ ने अपने फैसले में कहा कि मुकदमों के त्वरित निबटारे की प्रक्रिया की परिणति कभी भी न्याय के मकसद की बलि के रूप में नहीं होनी चाहिए.

हाईकोर्ट का फैसला भी निरस्त
पीठ ने इसके साथ ही 2013 में नाबालिग से बलात्कार और उसकी हत्या के मामले में मप्र हाईकोर्ट का फैसला निरस्त कर दिया. निचली अदालत और हाईकोर्ट के फैसले निरस्त करते हुए पीठ ने शीर्ष अदालत की टिप्पणियों से प्रभावित हुए बगैर ही निचली अदालत को इस मामले पर नए सिरे से विचार करने का निर्देश दिया.

9 साल की बच्ची से रेप और उसका मर्डर  
बता दें इस मामले में निचली अदालत ने आरोपी को 9 साल की बच्ची से बलात्कार, अप्राकृतिक यौनाचार और हत्या सहित कई अपराधों के लिए मौत की सजा सुनाई थी. हाईकोर्ट ने मौत की सजा के फैसले की पुष्टि की थी.

आपराधिक मामलों का तेजी से निबटारा जरूरी, लेकिन 
पीठ ने कहा कि इसमें कोई संदेह नहीं है कि आपराधिक मामलों का तेजी से निबटारा जरूरी है, लेकिन ऐसा करते समय सावधानी बरतने की जरूरत है और यह निष्पक्षता के बुनियादी सिद्धांत और आरोपी को बचाव की अनुमति की कीमत पर नहीं होना चाहिए.

कोर्ट ने सुनवाई के लिए एक मानदंड निर्धारित किया
पीठ ने बुधवार को सुनाए गए अपने फैसले में उम्र कैद या मौत की सजा की संभावना वाले सभी मामलों की सुनवाई के लिए एक मानदंड निर्धारित किया. इसके तहत ऐसे मामलों में अदालत की मदद के लिए सिर्फ उन्हीं अधिवक्ताओं को न्याय मित्र नियुक्त करना चाहिए जिनके पास वकालत करने या विधिक सेवा के माध्यम से आरोपी का प्रतिनिधित्व करने का कम से कम दस साल का
अनुभव हो.

इतनी तेजी से हुई सुनवाई
– 4 फरवरी, 2013 को आरोपी को गिरफ्तार किया गया था
– 13 फरवरी को पुलिस ने महज कुछ दिनों के भीतर ही कोर्ट में आरोप पत्र दाखिल किया था
– 19 फरवरी, 2013 को निचली अदालत ने आरोपी के खिलाफ आरोप निर्धारित किए और सुनवाई पूरी की
– 4 मार्च 2013 को आरोपी मौत की सजा सुनाई गई थी.
– 27 जून 2013 को एमपी हाईकोर्ट ने मौत की सजा बरकरार रखी और दोषी की अपील खारिज कर दी था

तेजी से निबटारा आरोपी को अवसर देने की कीमत पर न हो
शीर्ष अदालत ने कहा कि इसमें संदेह नहीं कि आपराधिक मामलों का तेजी से निबटारा होना जरूरी है, क्योंकि यह निष्पक्ष सुनवाई का हिस्सा होता है. परंतु मुकदमे के तेजी से निबटारे की प्रक्रिया निष्पक्षता और आरोपी को अवसर देने की कीमत पर नहीं की जानी चाहिए, क्योंकि यह समूची अपराध न्याय प्रशासन की बुनियाद है.

आरोपी का वकील पेश ही नहीं हो सका
शीर्ष अदालत ने कहा कि विधित सेवा प्राधिकरण ने निचली अदालत में आरोपी का प्रतिनिधित्व करने के लिए 18 फरवरी को एक अधिवक्ता नियुक्त किया, लेकिन वह मुकदमे की सुनवाई के लिए अगले दिन पेश ही नहीं हुआ.

विचार विमर्श के लिए पर्याप्त समय नहीं मिला
पीठ ने कहा, पेश मामले में 19 फरवरी, 2013 को न्याय मित्र नियुक्त होता है और उसी दिन आरोप निर्धारित करने के चरण में आरोपी के बचाव के लिए उसे बुलाया गया. पूरे विश्वास के साथ यह कहा जा सकता है कि न्याय मित्र को इस मामले के बुनियादी दस्तावेजों का अध्ययन करने या आरोपी के साथ किसी प्रकार के विचार विमर्श के लिए पर्याप्त समय नहीं मिला.

किसी भी तरह की निष्पक्षता नहीं थी
पीठ ने सुप्रीम कोर्ट विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से आरोपी का प्रतिनिधित्व कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ लूथरा के इस
कथन का संज्ञान लिया और कहा कि इस मामले की सुनवाई करने में किसी भी तरह की निष्पक्षता नहीं थी.

तेजी से सुनवाई पूरी होने से न्‍याय का हित नहीं
न्यायालय ने कहा, हमारी राय में, निचली अदालत ने तेजी से सुनवाई पूरी करने का नजरिया अपनाया होगा, लेकिन इसने न्याय का हित नहीं किया.

हर दौर में आरोपी को पूरा अवसर मिले
पीठ ने कहा कि ऐसे अपराध, जिनमें मौत की सजा एक वैकल्पिक दंड हो सकता है, उन मुकदमों की सुनवाई के दौरान अदालतों को पूरी तरह सतर्क रहना चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए की प्रत्येक दौर में आरोपी को पूरा अवसर मिले.