नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने न्यायालय ने जम्मू-कश्मीर विधानसभा भंग करने के राज्यपाल सत्यपाल मलिक के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका सोमवार को खारिज कर दी. प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई और न्यायमूर्ति संजय किशन कौल की पीठ ने कहा, ”हम दखल नहीं देना चाहते (राज्यपाल के फैसले में).” पीठ बीजेपी नेता गगन भगत की जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी. भगत भंग विधानसभा के सदस्य थे. Also Read - कोरोना वायरस के बारे में सही सूचना के लिये 24 घंटे में पोर्टल बनाये केन्द्र: सुप्रीम कोर्ट

वरिष्ठ अधिवक्ता जयदीप गुप्ता ने पीठ को बताया था कि मलिक ने विधानसभा भंग कर दी है, जबकि सरकार बनाने का दावा करने वाले दो पत्र उनके सामने थे. राज्यपाल सत्यपाल मलिक के विधानसभा को भंग करने और राज्यपाल शासन लागू करने के फैसले के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई करने से सोमवार को इनकार करते हुए प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई और जस्टिस संजय कृष्ण कौल की पीठ ने कहा, “हम इस पर सुनवाई नहीं करेंगे.” Also Read - Covid-19: कोरोना के चलते मजदूरों का पलायन, केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट से कहा- 23 लाख लोगों को दे रहे हैं खाना

राज्य की भंग की गई विधानसभा के सदस्य भाजपा के गगन भगत की ओर से पेश वकील जयदीप गुप्ता ने सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व के फैसले का उल्लेख किया, जिसमें कहा गया था कि राज्यपाल को विधानसभा भंग करने का फैसला लेने से पहले हरसंभव प्रयत्न करना चाहिए था कि क्या राज्य में सरकार बनने की गुंजाइश है? Also Read - कोरोना के कारण मजदूरों का पलायन: कोर्ट ने तलब की रिपोर्ट, डर दहशत को बताया वायरस से भी बड़ी समस्या

बता दें कि बीते 21 नवंबर को राज्यपाल ने नाटकीय घटनाक्रम में निलंबित जम्मू-कश्मीर विधानसभा को आनन-फानन में भंग कर दिया था. इसके कुछ ही घंटे पहले पीपल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) ने प्रतिद्वंद्वी नेशनल कॉन्फ्रेंस और कांग्रेस के समर्थन से सरकार बनाने का दावा पेश किया था.

इसके बाद दो सदस्यीय पीपल्स कॉन्फ्रेंस ने बीजेपी और अन्य दलों के 18 विधायकों के समर्थन के दम पर सरकार बनाने दावा पेश किया था. पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने राज्यपाल को पत्र भेज कहा था कि उनकी पार्टी के 29 विधायक हैं और उसे नेशनल कॉन्फ्रेंस के 15 विधायकों और कांग्रेस के 12 विधायकों का समर्थन प्राप्त है.

राज्यपाल द्वारा विधान सभा भंग करने निर्णय की घोषणा राज भवन की ओर से जारी एक विज्ञप्ति में की गई थी. छह महीने का राज्यपाल शासन 18 दिसंबर को समाप्त हो रहा है. इसके बाद राष्ट्रपति शासन लगाया जाएगा. विधानसभा का कार्यकाल अक्टूबर 2020 तक है. महबूबा मुफ्ती नीत पीडीपी और भाजपा की गठबंधन सरकार के पतन के बाद 19 जून को राज्य में राज्यपाल शासन लगा दिया गया था.