नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट द्वारा कथित फर्जी मुठभेड़ मामलों में आरोपित मणिपुर के कुछ पुलिसकर्मियों को कथित रूप से ‘हत्यारा’ कहे जाने पर केंद्र ने सवाल उठाते हुए कहा कि इस टिप्पणी ने घुसपैठ से प्रभावित क्षेत्रों में तैनात सशस्त्र बलों और सुरक्षाकर्मियों के मनोबल को पूरी तरह झकझोर दिया है. सरकार ने न्यायमूर्ति मदन बी लोकूर और न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता की पीठ से कहा कि वह मणिपुर फर्जी मुठभेड़ के मामलों की सुनवाई से इस पीठ को अलग करने के कुछ मणिपुर पुलिस कार्मिकों के आवेदनों का समर्थन करती है. इन मामलों में केंद्रीय जांच ब्यूरो का विशेष जांच दल जांच कर रहा है.

1528 मामलों की जांच का आदेश

हालांकि, याचिकाकर्ताओं ने सरकार की इस दलील का प्रतिवाद करते हुये कहा कि यह अदालत को प्रभावित करने का प्रयास कर रही है और पीठ को इस मामले की सुनवाई से खुद को अलग नहीं करना चाहिए. यह पीठ मणिपुर में 1528 मामलों की जांच के लिये दायर जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही है. इन याचिकाओं की सुनवाई के दौरान ही अदालत ने पिछले साल 14 जुलाई को एक एसआईटी गठित की थी और प्राथमिकी दर्ज करने और जांच करने का आदेश दिया था.

पुलिसकर्मियों-सैनिकों ने भी दी चुनौती

इन पुलिसकर्मियों के अलावा तीन सौ से ज्यादा सैनिकों ने भी शीर्ष अदालत में याचिका दायर करके मणिपुर और जम्मू कश्मीर में कार्रवाई के लिये उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज किये जाने को चुनौती दी है. इन दोनों राज्यों में सशस्त्र बल (विशेष अधिकार) कानून लागू है.

अटॉर्नी जनरल ने रखा सुरक्षाकर्मियों का पक्ष

अटॉर्नी जनरल के के वेणुगोपाल ने पीठ से कहा, केंद्र सरकार से मुझे निर्देश मिला है कि हम इन याचिकाओं का समर्थन कर रहे हैं. जहां तक मणिपुर में सशस्त्र बल का संबंध है तो वे बहुत ही कठिनाई के साथ घुसपैठियों के साथ संघर्ष कर रहे हैं.अटार्नी जनरल ने सशस्त्र बल (विशेष अधिकार) कानून प्रभावी क्षेत्रों में, कार्रवाई कर रहे सशस्त्र बल के कार्मिकों और पुलिस कार्मिकों पर मुकदमे चलाने पर सवाल उठाया. उन्होंने कहा कि वे समझ ही नहीं पा रहे हैं कि उन्हें मुकदमों का सामना क्यों करना पड़ रहा है. उन्होंने कहा कि पीठ की इन कथित टिप्पणियों से पुलिस और सशस्त्र बलों का मनोबल प्रभावित हुआ है कि ये पुलिसकर्मी हत्यारे हैं.

उन्होंने कहा कि सशस्त्र बल मणिपुर में उग्रवाद से लड़ने में मुश्किल घड़ी का सामना कर रहे हैं और अदालत की टिप्पणियों ने उनका मनोबल पूरी तरह हिलाकर रख दिया है. पीठ ने कहा कि 30 जुलाई को सुनवाई के दौरान की गयी टिप्पणियां किसी व्यक्ति के खिलाफ जानबूझ कर नहीं की गयीं थी और ऐसा सिर्फ जांच ब्यूरो के निदेशक के साथ चर्चा के दौरान हो गया था. इन पुलिसकर्मियों के विरुद्ध आरोपपत्र दायर किया जा चुका है.

(भाषा इनपुट)