नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कहा कि महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस द्वारा 2014 में चुनाव के समय हलफनामे में दो आपराधिक मामलों की जानकारी नहीं देने की ‘भूल चूक’ के बारे में निचली अदालत निर्णय कर सकती है.पीठ ने सुनवाई पूरी करते हुए कहा, हमारा सरोकार बहुत ही सीमित मुद्दे पर है कि क्या इस मामले में पहली नजर में जन प्रतिनिधित्व कानून की धारा 125 लागू होती है या नहीं.Also Read - सुप्रीम कोर्ट ने EVM को लेकर दायर याचिका खारिज की, फटकार भी लगाई

प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई, न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता और न्यायमूर्ति अनिरुद्ध बोस की पीठ ने देवेंद्र फडणवीस पर जनप्रतिनिधत्व कानून के तहत मुकदमा चलाने के लिए सतीश यूकी की अपील पर मंगलवार को सुनवाई पूरी की और कहा कि इस पर फैसला बाद में सुनाया जाएगा. Also Read - Model Suicide: मुंबई में फंदे से लटका मिला मॉडल का शव, सुसाइड नोट से हुआ मौत का खुलासा | Watch Video

यह धारा मूल रूप से गलत हलफनामा दाखिल करने से संबंधित है और यदि कोई प्रत्याशी या उसका प्रस्तावक नामांकन पत्र के साथ लंबित आपराधिक मामलों के बारे में कोई जानकारी देने में विफल रहता है या उसे छुपाता है और यह साबित हो जाता है तो प्रत्याशी को छह महीने की कैद या जुर्माना या दोनों की सजा हो सकती है. Also Read - मुंबई से आई बुरी खबर: फंदे से लटका मिला 30 साल की मॉडल का शव, सुसाइड नोट में बयां किया दर्द

सतीश यूकी का तर्क है कि दो लंबित उन आपराधिक मामलों का, जिनका अदालत संज्ञान ले चुकी है, चुनावी हलफनामे में उल्लेख करने में विफल रहने की वजह से फडणवीस पर जनप्रतिनिधित्व कानून के प्रावधानों के तहत मुकदमा चलाया जाना चाहिए.

पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा, आपके पास मौका था, आप उन मामलों की जानकारी दे सकते थे, जिनमें अदालत ने संज्ञान लिया है. यह चूक धारा 125 के तहत मुकदमा चलाने योग्य है या नहीं, इसका निर्णय निचली अदालत कर सकती है. फडणवीस ने अपने हलफनामे मे उन मामलों का जिक्र किया था, जिनमें निचली अदालत आरोप निर्धारित कर चुकी थी.

फडणवीस की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने कानून के प्रावधान का हवाला देते हुए कहा कि हलफनामे में जानकारी छुपाने की वजह से नामांकन खारिज करने का चरण निकल चुका है और अब सवाल सिर्फ यही है कि क्या विधायक पर मुकदमा चलाया जा सकता है.
उन्होंने कहा कि बॉम्‍बे हाईकोर्ट ने अपीलकर्ता यूकी की याचिका खारिज कर दी थी.

पीठ ने कहा कि कुल मिलाकर मामला यह है कि आपको उन लंबित आपराधिक मामलों की जानकारी देनी है, जिनमें आरोप निर्धारित हो चुके हैं. यह आपने किया. लेकिन दो मामलों (जिनका अदालत संज्ञान ले चुकी है) की जानकारी देने में आपसे चूक हुई है.

पीठ ने रोहतगी से सवाल किया कि तथ्य छुपाने के मुद्दे पर आप धारा 125ए के प्रावधान से कैसे निबटेंगे. यूकी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता विवेक तन्खा ने कहा कि मुख्यमंत्री ने दो आपराधिक मामलों का खुलासा नहीं करके हलफनामे में गलत जानकारी दी लेकिन इसके बावजूद निचली अदालत और उच्च न्यायालय ने कहा कि इसमें पहली नजर में कोई मामला नहीं बनता है. उन्होंने कहा कि प्रत्याशी के लिए सभी आपराधिक मामलों की जानकारी देना कानूनी रूप से अनिवार्य है.